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मुंबई आतंकी हमला: पिछले 8 सालों में केस से जुड़े 9 जजों का तबादला, लखवी को जमानत देने वाले जैदी करेंगे सुनवाई

Patrika news network Posted: 2017-05-20 11:09:08 IST Updated: 2017-05-20 11:09:08 IST
मुंबई आतंकी हमला: पिछले 8 सालों में केस से जुड़े 9 जजों का तबादला, लखवी को जमानत देने वाले जैदी करेंगे सुनवाई
  • नए जज के तौर पर अब इस केस की सुनवाई कौसर अब्बास जैदी करेंगे। ध्यान हो कि जैदी ने इस मामले के मास्टरमाइंड जकीउर रहमान लखवी को साल 2014 के दिसंबर में जमानत दे दी थी।

लाहौर।

साल 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले और इस इसमें मारे गए 166 से अधिक लोगों के मामले की सुनवाई कर रही पाकिस्तान की विशेष अदालत के जज को एक बार फिर से बदला गया है। ऐसे में इस मामले को लेकर पाक की लचर रवैया का साफ अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं पाक अदालत की कार्यवाही और उसकी स्वतंत्रता को लेकर इस मामले में हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। 


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पाकिस्तान में साल 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमले की सुनवाई वहां की आतंकवाद निरोधी अदालत कर रही है। जिसमें 7 लोगों के खिलाफ केस चल रहा है। तो वहीं अभी तक पिछले 8 सालों में इस केस से जुड़े 9 जजों को बदला जा चुका है। शुक्रवार को पाक की विशेष अदालत के एक अधिकारी ने बताया कि इस केस जुड़े अधिकारी का तबादला कर उनके स्थान पर नए न्यायधीश की नियुक्ति कर दी गई है। 



नए जज के तौर पर अब इस केस की सुनवाई कौसर अब्बास जैदी करेंगे। ध्यान हो कि जैदी ने इस मामले के मास्टरमाइंड जकीउर रहमान लखवी को साल 2014 के दिसंबर में जमानत दे दी थी। तो वहीं जमानत मिलने के बाद लखवी आजाद है, और किसी अज्ञात जगह पर छुपा गया है। जबकि इस मामले में अन्य 6 आरोपी रावलपिंडी के अदियाला जेल में कैद हैं। 


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सूत्रों के मुकाबिक, पाकिस्तान आतंकवाद निरोधी अदालत (एटीएस) के न्यायधीश के तौर पर  सोहेल अकरम पिछले 2 सालों से मुंबई आतंकी हमले की सुनवाई कर रहे थे। अब इस तबादले के बाद उन्हें पंजाब न्यायिक सेवा में भेज दिया गया है। अब इस मामले की सुनवाई एक बार फिर जैदी करेंगे, जो कि पहले भी इस केस के न्यायधीश रह चुके हैं। 



गौरतलब है कि मुंबई में 26 नवंबर 2008 में हुए आतंकी हमले की सुनवाई पाकिस्तान में साल 2009 में शुरु हुई थी। जहां इस केस से जुड़े 24 गवाहों को भेजने के लिए पाक ने भारत से कहा था। तो वही इस केस से जुड़े मुख्य आरोपी हाफिज सईद के खिलाफ पाकिस्तान ने मुकदमा चलाने से मना कर दिया था। पिछले 8 सालों में इस केस की सुनवाई सोहेल अकरम और जैदी के अलावा मलिक मुहम्मद अकरम अवान अतीकुर रहमान, शाहिद रफीक और परवेज अली शाह भी कर चुके हैं। लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है। 

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