ड्रैगन की नापाक चाल, ग्वादर व हिंद महासागर में 1 लाख नौसैनिक तैनात करेगा चीन

Patrika news network Posted: 2017-03-16 09:25:27 IST Updated: 2017-03-16 09:32:15 IST
ड्रैगन की नापाक चाल, ग्वादर व हिंद महासागर में 1 लाख नौसैनिक तैनात करेगा चीन
  • कुछ समय से चीन लगातार अपनी नौसेना के विस्तार को लेकर काफी आक्रामक तेवर अपना रहा है...

बीजिंग।

चीन अब विदेशों में भी अपने नौसैनिकों की अधिक संख्या में तैनाती करेगा। जहां चीन इन नौसैनिकों की तैनाती करेगा उसमें बलूचिस्तान स्थित ग्वादर बंदरगाह और हिंद महासागर का जिबूती मिलिट्री लॉजिस्टिक्स बेस शामिल है। चीन यहां अपने नौसैनिकों की संख्या को 20 हजार से बढ़ाकर एक लाख तक करने जा रहा है। पिछले कुछ समय से चीन लगातार अपनी नौसेना के विस्तार को लेकर काफी आक्रामक तेवर अपना रहा है।


नौसैनिकों की संख्या बढ़ाने की इस रणनीति का मकसद भी चीन के सागरीय हितों की रक्षा करना है। ग्वादर बंदरगाह सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। चीन के साथ-साथ पाकिस्तान भी 15,000 सैनिकों वाला अपना एक विशेष सुरक्षा दस्ता तैयार कर रहा है। इस खास दस्ते में 9,000 सैनिक और 6,000 अद्र्धसैनिक बलों को शामिल किया गया है। यह दस्ता चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे और चीनी सैनिकों की सुरक्षा पर नजर रखेगा।


नौसेना का विस्तार, थल सेना में कमी

अमरीका में ट्रंप प्रशासन के सत्ता में आने और दक्षिणी चीन सागर पर अधिकार के विवाद को देखते हुए चीन अपनी नौसेना का आकार बढ़ा रहा है। वहीं थल सेना की संख्या में कमी कर रहा है। 


ग्वादर बंदरगाह 

ग्वादर गहरे समुद्र का एक अहम बंदरगाह है। यह फारस की खाड़ी के अंदर मुख्य तेल मार्ग में स्थित है। इसके निर्माण की लागत का खर्च चीन ने दिया है। यहां चीन भले ही अपनी सेना को तैनात ना करे, लेकिन आने वाले दिनों में उसके नौसैनिक जहाज जरूर खड़े दिखेंगे। ग्वादर 30 खरब से ज्यादा की लागत से तैयार चीन-पाक इकनॉमिक कॉरिडोर के लिए भी अहम है। यह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को चीन के शिनजांग प्रांत के साथ जोड़ता है।


गिलगित-बाल्टिस्तान को बनाएंगे पांचवां प्रांत 

रणनीतिक रूप से अहम माने जाने वाले विवादित गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र को पाकिस्तान अपना पांचवां प्रांत घोषित करने की योजना बना रहा है। पाक यह कदम चीन की चिंताओं को देखते हुए उठा रहा है। यह इलाका पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से सटा हुआ है। ऐसे में भारत के लिए पाकिस्तान का यह कदम चिंता की वजह बन सकता है। इस प्रोजेक्ट पर भारत कई बार आपत्ति जता चुका है। पीओके से गुजरने के चलते यह प्रोजेक्ट भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है।

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