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9 भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं रामनाथ कोविंद, परिवार को मिल गए थे राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाए जाने के संकेत

Patrika news network Posted: 2017-06-20 10:13:01 IST Updated: 2017-06-20 10:13:01 IST
9 भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं रामनाथ कोविंद, परिवार को मिल गए थे राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाए जाने के संकेत
  • रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाए जाने का संकेत उनके परिवार को कुछ दिन पहले ही मिल गया था। यही कारण है कि बड़े भाई रामस्वरूप भारती चार दिन पहले ही पटना स्थित राजभवन पहुंच गए थे।

कानपुर

रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाए जाने का संकेत उनके परिवार को कुछ दिन पहले ही मिल गया था।  यही कारण है कि बड़े भाई रामस्वरूप भारती चार दिन पहले ही पटना स्थित राजभवन पहुंच गए थे। रामस्वरूप ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कानपुर आने पर वे अपने घर के बाहर चौपाल जरूर लगाते हैं। हमेशा दूसरी जातियों के लोग भी इसमें शामिल होते हैं।


बेटा कारोबारी, बेटी एयर इंडिया में

रामनाथ एक बेटे प्रशांत व बेटी स्वाति के पिता हैं। दोनों संतानों ने एयर इंडिया से अपने कॅरियर की शुरुआत की है। स्वाति अभी एयर इंडिया में कार्यरत हैं, किन्तु बेटा प्रशांत अब एयर इंडिया छोड़ चुका है। प्रशांत दिल्ली में पेट्रोल पंप सहित अन्य कारोबार संभालते हैं। दोनों भाई-बहन लगातार अपने गांव आते-जाते हैं।


करियर : एक नजर में 

1945 में जन्मे कोविंद ने कानपुर के डीएवी लॉ कॉलेज से विधि स्नातक की परीक्षा पास की। 

16 वर्ष तक दिल्ली उच्च न्यायालय व सुप्रीम कोर्ट में वकालत

1977-1993 तक सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे। 

अप्रेल 1994 में पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए और 12 साल तक सदस्य रहे। 

1998 से 2002 तक भाजपा के दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। 

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और उत्तर प्रदेश के महामंत्री रहे


देश को नौ पीएम देने वाले यूपी से पहले राष्ट्रपति 

उत्तर प्रदेश भले ही अब तक देश को नौ प्रधानमंत्री दे चुका हो लेकिन रामनाथ कोविंद यहां से पहले राष्ट्रपति होंगे। हालांकि इससे पहले लखनऊ के निवासी मोहम्मद हिदायतुल्ला 1969 में राष्ट्रपति तो बने  थे लेकिन कार्यवाहक। वह भी  लगभग एक माह के लिए । तब 03 मई, 1969 को तत्कालीन राष्ट्रपति जाकिर हुसैन के निधन के बाद तत्कालीन उपराष्ट्रपति वीवी गिरी को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया था, लेकिन उसी वर्ष जुलाई में राष्ट्रपति पद के चुनाव शामिल होने के लिए उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा था। ऐसे देश के मुख्य न्यायाधीश हिदायतुल्ला ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में पद संभाला था। 

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