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उदयपुर रोडवेज में हो रहे ऐसे घोटाले, ना कमाई का पता ना खर्च का

Patrika news network Posted: 2017-07-13 12:15:38 IST Updated: 2017-07-13 12:15:38 IST
उदयपुर रोडवेज में हो रहे ऐसे घोटाले, ना कमाई का पता ना खर्च का
  • रोडवेज के उदयपुर आगार में कई खेल हो रहे हैं। एक खुलासा हाल ही हुआ जिसमें कार्यशाला से बस बारात के नाम से रवाना हुई, दूसरे दिन यह बस लौटकर हरिद्वार चली गई।

धीरेन्द्र जोशी / उदयपुर

रोडवेज के उदयपुर आगार में कई खेल हो रहे हैं। एक खुलासा हाल ही हुआ जिसमें कार्यशाला से बस बारात के नाम से रवाना हुई, दूसरे दिन यह बस लौटकर हरिद्वार चली गई। लेकिन इसकी एवज में न तो राशि निगम के खजाने में जमा हुई और न ही डीजल का खर्च दर्शाया गया।

मामला निलंबित परिचालक और रोडवेज कर्मचारियों की यूनियन की शिकायत में उजागर हुआ है। बताया कि 29 अप्रेल, 2016 को हरिद्वार रूट पर चलने वाली बस संख्या आरजे27-पीए 6114 दोपहर में उदयपुर पहुंची। यह शाम को 6.25 बजे कार्यशाला से निकली, जो अगली सुबह 30 अप्रेल को 9.45 बजे वापस कार्यशाला पहुंची। इसके बाद बस पुन: अपने रूट हरिद्वार के लिए निकल गई।  इधर करीब डेढ़ माह पूर्व कर्मचारियों की भारतीय मजदूर संघ  और निलंबित परिचालक लोकेश दाधीच ने सीएम कार्यालय और एसीबी में इसकी शिकायत की। 



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मुख्यमंत्री कार्यालय की शिकायत के बाद संयुक्त महाप्रबंधक वित्त ने 15 जून, 2017 को उदयपुर मुख्य प्रबंधक को पत्र लिख उसमें बस के 29-30 अप्रेल, 2016 तक किस मार्ग पर चली और कितना राजस्व अर्जित किया। राजस्व जमा की रसीद, वाहन पर ड्यूटी अंजाम देने वाले चालक एवं परिचालक सहित पूर्ण विवरण भेजने को कहा गया। 


इसका  जवाब मुख्य प्रबंधक उदयपुर ने 4 जुलाई, 2017 को दिया। उसमें बताया कि 29 अप्रेल, 2016 को बस हरिद्वार से उदयपुर आई थी, और अगले दिन बस पुन: हरिद्वार निकल गई। 



यहां किया गया गोलमाल

मुख्यालय से प्राप्त आदेश के बाद मुख्य प्रबंधक ने प्रबंधक संचालन को प्रबंधक यातायात को इस बस के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए कहा। लेकिन दोनों ही अधिकारियों ने 29 और 30 अप्रेल, 2016 को बस हरिद्वार से आना और पुन: हरिद्वारा जाना ही दर्शाया। जबकि यह बस 29 अप्रेल शाम को 6.25 बजे कार्यशाला से निकली और 30 अप्रेल को सुबह 9.45 बजे पुन: कार्यशाला पहुंची। बस के रात भर कार्यशाला में नहीं होने का उल्लेख जवाब में नहीं किया गया। 


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यहां भी है लोचा

इधर अधिकारी बस के रात को कार्यशाला में मौजूद होने और नहीं होने की बात को छिपा रहे हैं। वहीं यूनियन और निलंबित परिचालक की शिकायत के साथ ही कार्यशाला की आवक और जावक के रजिस्टर की कॉपी भी संलग्न है।

इससे जाहिर है कि यह बस 29 अप्रेल को कार्यशाला से निकली और 30 अप्रेल को जमा हुई है।  


किसकी बारात में गई

आवक-जावक रजिस्टर में बारात और बांसवाड़ा लिखा है। जबकि यह बस किसकी बारात में गई इसका उल्लेख कहीं नहीं है। कार्यशाला में कोई आवेदन भी नहीं है। शाम को बस ले जाने वाले मांगीलाल मेनारिया ने अगले दिन इसे जमा भी करवाया। 



शिकायत में आरोप

शिकायत में उदयपुर आगार के मुख्य प्रबंधक पर स्वयं की बारात छोडऩे के लिए बस को मंगवाने का आरोप लगाया गया है। उसमें बताया गया कि यह कार्य मुख्य प्रबंधक ने  अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को दबाव में लेकर करवाया।



गत दिनों मुख्यालय जयपुर से दस्तावेज उपलब्ध करवाने के लिए पत्र मिला था। जवाब में प्रबंधक संचालन एवं यातायात से प्राप्त रिपोर्ट मुख्यालय भिजवा दी है। इसके अतिरिक्त किसी प्रकार की शिकायत की जानकारी मुझे नहीं है।

दीपेश नागर, मुख्य प्रबंधक, उदयपुर आगार

rajasthanpatrika.com

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