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हनुमानजी नहीं थे ब्रह्मचारी, उनका भी हुआ था विवाह! यकीन नहीं हो रहा...पढ़ें पूरी खबर

Patrika news network Posted: 2017-07-10 16:24:32 IST Updated: 2017-07-10 16:31:48 IST
 हनुमानजी नहीं थे ब्रह्मचारी, उनका भी हुआ था विवाह! यकीन नहीं हो रहा...पढ़ें पूरी खबर
  • सुखाडि़या विवि के संस्कृत विभाग में श्रीराम भक्त हनुमान पर शोध...

रमाकांत कटारा/उदयपुर

मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में इन दिनों श्रीराम भक्त बजरंग बली पर संस्कृत एवं प्राकृत वाड्मय के आलोक में श्री हनुमान चरित्र का परशीलन विषयक शोध कार्य किया जा रहा है। संस्कृत साहित्य के सभी ग्रंथों में बजरंग बली को नैष्ठिक ब्रह्मचारी बताया गया है। इस शोध के दौरान दक्षिण भारत का एक ग्रंथ पाराशर संहिता प्रकाश में आया है। यह एकमात्र एेसा ग्रंथ  है जिसमें कहा गया है कि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को भगवान सूर्य ने अपनी पुत्री सुवर्चला का विवाह हनुमानजी के साथ किया था। 



शोधकर्ता डॉ. विकास कहना है कि एक ग्रंथ में यह भी व्याख्या है कि हनुमानजी के क्रमश: मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान, धृतिमान भाई थे। ये सभी विवाहित थे जिनका वंश वर्षों तक चला। हनुमानजी के बारे में यह जानकारी ब्रह्मांड पुराण नामक ग्रंथ में उपलब्ध होती है। प्राकृत के पउमचरियं हनुमानजी के 6 पूर्व भवों का उल्लेख मिलता है, इनमें बजरंगबली  दमयंत, सिंहचंद्र, राजकुमार, सिंहवाहन के रूप में मनुष्य लोक और तीन भवों में देवलोक में जन्मे थे। पउमचरियं पर्व 15 से 19 में यह कथा वर्णित है। 

जानिए क्या यह कहता है संस्कृत वाड्मय 

बजरंग बली का जन्म पवनदेव से हुआ था। वाल्मीकि रामायण में बताया गया है कि केसरी के जेष्ठ पुत्र थे। हनुमानजी ने गोकर्ण के ऋषियों और सूर्य से संपूर्ण व्याकरण, वेद-वेदांग का पूर्ण अध्ययन कर संपूर्ण विद्याओं को ग्रहण किया।



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नाम पर संस्कृत वाड्मय

सूर्य से हनुमान को सम्बल पाता देख कर राहु ने इंद्र को पुकारा। इंद्र ने हनुमानजी पर वज्र से प्रहार किया जिससे उनकी हनू यानी ठोडी  टूट गई। इस घटना के बाद इंद्र ने उनका नाम हनुमान रखा। इससे पहले हनुमानजी का नाम अनय था। संस्कृत साहित्य में  पवनसुत, पवनपुत्र, अंजनापुत्र, आंजनेय, बजरंगबली के नाम से व्याख्या प्राप्त होती है। 

यह कहता प्राकृत साहित्य 

शोध में वर्णित प्राकृत सहित्य के अनुसार हनुरूह द्वीप पर पालन-पोषण होने के कारण हनुमान  नाम से प्रसिद्ध हुए। बाल्यकाल में शिला पर गिरे तो शिला चूर-चूर हो गई इसलिए श्रीशैल कहा गया। अत्याधिक सुंदर होने के कारण सुंदर, पवनंजय के औरस पुत्र होने से पवनसुत और अंजना पुत्र होने के कारण आंजनेय नाम से हनुमान प्रसिद्ध हुए। शोधकर्ता विकास प्राकृत में पीएचडी कर चुके हैं और अब हनुमान चरित्र जानने के लिए संस्कृत में पीएचडी कर रहे हैं।  

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