हर्ष-हर्ष, जय-जय के जयकारों से गूंजा दीक्षा स्थल, अभय कुमार बने जयंत मुनि

Patrika news network Posted: 2017-05-19 02:13:31 IST Updated: 2017-05-19 02:16:00 IST
हर्ष-हर्ष, जय-जय के जयकारों से गूंजा दीक्षा स्थल, अभय कुमार बने जयंत मुनि
  • भगवान के जयकारों और हर्ष-हर्ष, जय-जय की गूंज के साथ संतों-साध्वियों की मौजूदगी में गुरुवार को झालौर के मुमुक्षु अभय कुमार चोरडि़या को दीक्षा दी गई।

उदयपुर.

भगवान के जयकारों और हर्ष-हर्ष, जय-जय की गूंज के साथ संतों-साध्वियों की मौजूदगी में गुरुवार को झालौर के मुमुक्षु अभय कुमार चोरडि़या को दीक्षा दी गई। दीक्षा के बाद गुरु महाश्रमण जिनेंद्र मुनि ने उनका नाम जयंत मुनि रखा। इसके साथ ही उनका सांसारिक जीवन छूट गया और वे संतों की श्रेणी में आ गए।



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यह दीक्षा महोत्सव गुरुवार को अखिल भारतीय श्री गुरु पुष्कर संगठन समिति की ओर से सेक्टर-11 स्थित आदिनाथ भवन सभागार में हुआ। महोत्सव में महाश्रमण जिनेन्द्र मुनि के सान्निध्य में उपाध्याय जितेन्द्र मुनि, प्रवीण मुनि, डॉ. हर्ष प्रभा, किरण प्रभा, मंगल ज्योति, डॉ. सुदर्शन प्रभा, विनयवति, साध्वी स्वाति, प्राची आदि साध्वियों और संतों सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नगर निगम महापौर चन्द्रसिंह कोठारी, विशिष्ट अतिथि नगर विकास प्रन्यास अध्यक्ष रविन्द्र श्रीमाली, अध्यक्ष के रूप में तपोमूर्ति जीवन सिंह, राजेश सिंह मेहता उपस्थित रहे। दीक्षा समारोह के प्रारम्भ में दीक्षार्थी अभय कुमार ने जिनेन्द्र मुनि सहित सभी मुनिवृन्दों का आश्ीर्वाद लेकर उपस्थित जनों को अपना परिचय दिया। उन्होंने कहा कि दीक्षा परमात्मा को पाने की पहली सीढ़ी है और अरिहन्त के चरणों में स्थान पाने का मार्ग है।

उपाध्याय जितेन्द्र मुनि ने दीक्षार्थी की विभिन्न दीक्षा विधियां सम्पन्न करवाई। इस दौरान जैसे ही महाश्रमण जिनेन्द्र मुनि ने दीक्षार्थी का नामकरण कर अभय कुमार को जयन्त मुनि उद्घोषित किया तो जयकारों से सभागार गूंज उठा। गुरूवर ने जयन्त मुनि की पंच मुष्ठीकैशलोच की विधि सम्पादित कर जयन्त मुनि को मंच पर मुनिवृन्दों के साथ ही आसन ग्रहण करवाया।

जिनेन्द्र मुनि ने अपने प्रवचनों मे कहा कि जयन्त मुनि के संकल्प, साधना और दृढ निश्चय के आगे आज हर कोई नतमस्तक है। दीक्षा लेना इतना आसान काम नहीं है। इन्होंने प्रेम से परिवार, रिश्ते-नातेदारों का सभी का दिल जीत कर आज यह मुकाम हासिल किया। दीक्षा ही ऐसा मार्ग है तो मनुष्य को भीतर तक की यात्रा करवाती है। अन्त में गुरूवर ने सभी को मंगलपाठ सुनाया।

गाजे-बाजे के साथ दिक्षार्थी पहुंचे दीक्षा स्थल

दीक्षार्थी के धर्म परिवार दलपत सिंह के निवास से सुबह वर-घोड़े के साथ दीक्षार्थी गाजे-बाजे के साथ दीक्षा स्थल के लिए रवाना हुए। हाथी-घोड़े, बैण्ड-बग्घी के साथ ही बड़ी संख्या में श्रवाक-श्राविकाएं इस यात्रा में साथ रहे और पूरे  मार्ग मे नाचते और झूमते रहे।

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