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यह खबर आपको कर देगी हैरान, उदयपुर की सिर्फ 42 विवाह वाटिकाएं वैध, शेष अवैध

Patrika news network Posted: 2017-05-12 12:12:58 IST Updated: 2017-05-12 12:12:58 IST
यह खबर आपको कर देगी हैरान, उदयपुर की सिर्फ 42 विवाह वाटिकाएं वैध, शेष अवैध
  • भरतपुर के मैरिज होम में गिरी दीवार से 25 की मौत के बाद उदयपुर में भी चिंता बढ़ गई है। हमारे यहां भी वाटिकाओं को लेकर नियम-कायदों की सख्ती से पालना नहीं की जा रही है। बड़ी बात यह भी है कि लाइसेंसशुदा 42 वाटिकाओं के अलावा सब की सब अवैध रूप से चल रही हैं।

उदयपुर.

भरतपुर के मैरिज होम में गिरी दीवार से 25 की मौत के बाद उदयपुर में भी चिंता बढ़ गई है। हमारे यहां भी वाटिकाओं को लेकर नियम-कायदों की सख्ती से पालना नहीं की जा रही है। बड़ी बात यह भी है कि लाइसेंसशुदा 42 वाटिकाओं के अलावा सब की सब अवैध रूप से चल रही हैं। मुख्य सड़कों वाली वाटिकाओं के बाहर तो सड़कों पर वाहन खड़े करने वालों की जान पर हर समय खतरा रहता है लेकिन किसी को कोई चिंता नहीं है। शहर में नगर निगम ने जिन वाटिकाओं को लाइसेंस दे रखे है, उन पर भी बोर्ड की बैठकों में सदस्यों ने सवाल उठाए थे कि मौका स्थिति नियमों के विपरीत है, फिर लाइसेंस कैसे दे दिए गए। सत्ता पक्ष के पार्षद जगत नागदा ने तो इतना तक कहा था कि अफसर गलियां निकालकर लाइसेंस दे रहे हैं। 



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सुंदरवास मुख्य रोड पर जिस वाटिका को लाइसेंस दे रखा है, वहां होने वाले मांगलिक आयोजन में आने वाले लोगों के वाहन सड़क के दोनों तरफ खड़े किए जाते हैं। इस मार्ग से रात में फतहनगर, मंगलवाड़ की तरफ से आने वाली बसों से हर समय हादसे की आशंका रहती है, जाम की समस्या तो है ही। इसी प्रकार प्रतापनगर-सुखेर रोड पर भी शाादियों के दौरान वाटिकाओं के बाहर वाहनों का जमघट लगा रहता है और वहां पर भी भारी वाहन गुजरते है। शहर में हिरणमगरी, विवि मार्ग, बोहरा गणेशजी रोड सहित कई स्थानों पर वाटिकाओं के बाहर संकरी सड़कों पर वाहनों की पार्किँग से रास्तें ही बाधित हो जाते है जिससे दुपहिया वाहनधारी भी परेशान हो जाते है।



सुरक्षा व्यवस्था जीरो

अवैध वाटिकाओं में आगजनी सहित आपात स्थिति से निपटने के लिए फायर सिस्टम या कोई सुरक्षा इंतजाम तक नहीं हैं। पार्किंग के नाम पर सार्वजनिक स्थानों का उपयोग कर रहे है और अंदर भी सुरक्षा के जो मानक नगर निगम ने उप विधियों में बना रखे है वे पूरे नहीं है।

हाईकोर्ट कह चुका

हाईकोर्ट ने वाटिकाओं के मामले में पिछले बार सुनवाई में साफ तौर पर कहा कि जिला कलक्टर पूरी तरह से समीक्षा करें और निगरानी रखावे। हाईकोर्ट ने कहा कि वाटिकाओं के बाहर जो भी गाडिय़ां खड़ी की जाती है तो पुलिस को बुलाकर कार्रवाई की जाए।

 

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 पिछली बार हमने करीब एक सप्ताह में तीन लाख रुपए अवैध वाटिकाओं से वसूले हैं। दिक्कत यही होती है कि बहुत सी वाटिकाएं आंतरिक क्षेत्र में है और वहां मांगलिक आयोजन होने की जानकारी नहीं हो पाती है। अब यूआईटी की पेराफेरी क्षेत्र तक की वाटिकाएं भी जिम्मेदारी हमारे पास आ गई हैं। हमारे यहां पहले जितना स्टाफ था उससे दस गुणा कम हो गया है और काम बहुत बढ़ गया है फिर भी हम जुर्माने के अलावा सीज करने की भी कार्रवाई करते हैं।   

चन्द्रसिंह कोठारी, महापौर

rajasthanpatrika.com

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