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एशिया को उदयपुर बताएगा कैसे जानें खाने का स्वाद अमरीका में करेगा टेक्सचर उपलब्ध कराने की पहल

Patrika news network Posted: 2016-11-30 13:57:59 IST Updated: 2016-11-30 13:57:59 IST
एशिया को  उदयपुर बताएगा कैसे जानें खाने का स्वाद  अमरीका में करेगा टेक्सचर उपलब्ध कराने की पहल
  • पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो रही है स्वाद की नई तकनीक

रमाकांत कटारा/उदयपुर

सबकुछ ठीक रहा तो जल्द हमारे देश के आम लोग बाजार में उपलब्ध होने वाले लगभग हर खाद्य उत्पादों के बारे में जान पाएंगे कि वह स्वाद और स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद हैं। इसके लिए उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के फूड और डेयरी साइंस तकनीक कॉलेज (सीडीएफएसटी) ने टेक्सचर तकनीक ईंजाद की है। इस तकनीक से खाने की चीजों में स्वाद और गुणवत्ता का पता चल जाएगा। आगामी दिसबंर में अमरीका में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पहली बार हमारी इस तकनीक को सार्वजनिक किया जाएगा। इस दौरान भारत साउथ-एशियन देशों के लिए इस तकनीक को उपलब्ध कराने की पहल भी करेगा। इसके बाद एशिया के सभी देशों में खाद्य पदार्थों का टेक्सचर हमारी उपलब्धि से जाना जाएगा। सीडीएफएसटी के डीन प्रो. एलके मुर्डिया इसको प्रस्तुत करेंगे। अब तक कोलोराडो यूनिवर्सिटी, डेकोरा यूनिवर्सिटी, ओहियो विश्वद्यालय इस तकनीक पर कार्य कर रहे हैं। 


सरलता से लागू हो सकती है तकनीक 

टेक्सचर तकनीक रखने वाले विश्वविद्यालय स्वाद और गुणवत्ता के सटीक मापदंड बता सकते हैं। पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि साउथ-एशियन देश लगातार लोकप्रिय हो रही इस तकनीक का लाभ लेने में भारत के साथ कार्य करने में रूचि दिखाएंगे। यह नवाचार सबके स्वास्थ्य हित में है।  

उत्पादों के चयन में होगी आसानी 

टेक्सचर से अच्छी गुणवत्ता वाली चीजों के चलन को बढ़ावा मिलेगा। स्वाद और विटामिंस निर्धारण होने से लोग जान सकेंगे कि क्या खाना उनके स्वास्थ्य के लिए अधिक उपयुक्त रहेगा। जंक फूड की जगह हैल्दी और टेस्टी फूड के प्रचलन को बढ़ावा मिलेगा। 


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टेक्सचर प्रक्रिया के तीन भाग होते हैं। एनलाइजर यह पता करता है स्वाद क्या होगा। रिहीमीटर कणों की पृथक मात्रा निर्धारित करता है। स्लोकिम पूरी प्रक्रिया को नापता है। यंत्र में उत्पाद पर दबाव एप्लाई किया जाता है। दूसरी विधि केमिकल की है। इसमें रसायनों से स्वाद, मात्रा और गुणवत्ता तय होती है। पहली विधि अब अधिक वैज्ञानिक है। 

किसी भी देश का विश्वविद्यालय यदि इस तकनीक के लिए सहयोग चाहेगा तो हम तैयार हैं। विवि ने सैम्पल जांच करने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया है। कौनसा स्वाद श्रेष्ठ है, इसकी टॉप रैंकिंग भी की जा रही है। 

- उमाशंकर शर्मा, कुलपति, एमपीयूएटी 

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