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एफडी के नाम पर बीमा पॉलिसियां मामला: उदयपुर के निजी बैंक की गड़बडि़यों के लगातार खुल रहे कारनामे

Patrika news network Posted: 2017-07-10 17:20:31 IST Updated: 2017-07-10 17:20:31 IST
एफडी के नाम पर बीमा पॉलिसियां मामला: उदयपुर के निजी बैंक की गड़बडि़यों के लगातार खुल रहे कारनामे
  • बैंकों की ठगी, टेबल के नीचे लाइट लगाकर फर्जी हस्ताक्षर

उदयपुर.

एफडी के नाम पर बीमा पॉलिसियां करने वाले निजी बैंक ने गरीब, ग्रामीण, किसान, बीपीएल, विधवाओं की फाइलों में एेसी-एेसी गड़बडि़यां की कि स्पेशल ऑपरेशन गु्रप (एसओजी) की टीम भी चकरघिन्नी हो गई। जांच में सामने आया कि बैंक अधिकारियों ने फर्जी हस्ताक्षर करने के लिए पारदर्शी टेबल के नीचे लाइट जलाकर बीमा कागजों पर हस्ताक्षरों की नकल की, वहीं सत्यापन कार्रवाई के लिए ग्राहकों के नम्बर की जगह अपने ही चपरासी व चौकीदारों के नम्बर लिखकर गुमराह किया और ग्राहक बनकर खुद ने ही कॉल सेन्टर पर सत्यापन प्रमाणित कर लिया। इतना हीं नहीं वृद्ध लोगों की उम्र घटाई, छात्रों को व्यवसायी बनाया, बीपीएल को व्यवसायी बताकर कागजों में गड़बडि़यां कर उनकी पॉलिसी लेप्स करते हुए पहली प्रीमियम की जमा राशियां हड़प ली। 



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फर्जी हस्ताक्षर में सब माहिर, उठा ली राशि

बैंक में एफडी के लिए कोई ग्राहक के पहुंचने पर अधिकारियों ने फॉर्म पर उनके हस्ताक्षर करवाए। एफडी के अमांउट चेक ले लिया लेकिन उस पर अपनी फर्म का नाम नहीं लिखवाया। एफडी का फॉर्म पर ग्राहक के हस्ताक्षर को बीमा कागज पर लेने के लिए सफेद कांच के नीचे हस्ताक्षर वाली जगह पर लाइट जलाते हुए ऊपर रखे बीमा कंपनी के फर्जी कागज पर स्याही से उकेरा। आम आदमी जांच में एकाएक इसे पकड़ नहीं पाता लेकिन एफएसएल में कई हस्ताक्षर फर्जी होने के खुलासे हुए है। फर्जी हस्ताक्षर में अमूमन बैंक के अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक सभी माहिर है।



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छात्र को व्यवसायी बताकर हड़पी राशि 

छात्र के पास कमाई का स्रोत नहीं होने से वह खुद के नाम से पॉलिसी नहीं ले सकते हैं, लेकिन निजी बैंक ने फर्जीवाड़ा कर कागजों में उन्हें व्यवसायी बताकर पॉलिसियां की। एफडी के नाम से पैसा लेकर बीमा पॉलिसी में डाल दिया। प्रत्येक वर्ष प्रीमियम जमा करवाने के पैसे नहीं होने पर छात्रों की पॉलिसी लैप्स कर पैसा हड़प लिया। इसके अलावा बीमा योजना के अनुसार 60 के ऊपर के लोगों की बीमा पॉलिसी जारी नहीं किए जा सकती है, एेसे लोगों को फांसने के लिए उनकी उम्र में हेरफेर किया जाता है। पॉलिसी के दौरान बीमाधारक का आयु प्रमाण पत्र अनिवार्य होता है किन्तु निजी बैंक की  बीमा फर्म ने अपने स्वार्थ के लिए यह शर्त ही हटा दी।

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