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बजट के अभाव में जमीन पर ही रखना पड़ रहा है दुर्लभ ग्रंथों को

Patrika news network Posted: 2017-01-20 09:35:45 IST Updated: 2017-01-20 09:35:45 IST
बजट के अभाव में जमीन पर ही रखना पड़ रहा है दुर्लभ ग्रंथों को
  • टोंक. विश्वविख्यात मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान में विभिन्न स्थानों पर रखे दुर्लभ ग्रंथ व किताबों को अब एक ही हॉल में रखा गया है। इससे यहां आने वाले पर्यटकों को पुस्तकालय में सभी प्रकार के ग्रंथ पढऩे को मिल जाएंगे।

टोंक

टोंक. विश्वविख्यात मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान में विभिन्न स्थानों पर रखे दुर्लभ ग्रंथ व किताबों को अब एक ही हॉल में रखा गया है। 



इससे यहां आने वाले पर्यटकों को पुस्तकालय में सभी प्रकार के ग्रंथ पढऩे को मिल जाएंगे। जबकि पहले ये ग्रंथ व किताबें संस्थान के विभिन्न 11 स्थानों पर रखे जाते थे।



 हालांकि बजट नहीं होने से अभी कई ग्रंथ व किताबों को उचित स्थान नहीं मिल पाया है। उन्हें फर्श या रैक के समीप ही रखा गया है। संस्थान की मंशा इस पुस्तकालय को म्यूजियम का रूप देने की भी है।


 इसके लिए फिलहाल पर्याप्त बजट नहीं है, लेकिन वर्तमान पुस्तकालय को ही सजाने की तैयारी की जा रही है।


यह मौजूद है पुस्तकालय में

मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान में सूफिज्म, उर्दू, अरबी एवं फारसी साहित्य, केटलॉग्स, यूनानी चिकित्सा की पुस्तक, स्वानेह हयात (आत्म कथा),



 मध्य कालीन इतिहास, स्वतंत्रता अभियान पर साहित्य, खत्ताती, रीमिया, कीमिया, सीमिया, दर्शन, तर्क शास्त्र, विधि शास्त्र, विज्ञान एवं शिकार आदि विषयों पर असीम साहित्य उपलब्ध है।



 इनके अलावा तारीख-ए-ताज गंज, जैबुत तवारीख, चहार गुलशन, सतसई, तारीख-ए-रणथम्भौर, तारीख-ए-राजस्थान, रुकेकाते लक्ष्मण सिंह, संस्कृत से फारसी भाषा में



 अनुवाद की गई गीता, महाभारत, रामायण, अकबरनामा, आईने अकबरी, शाहजहांनामा, बाबरनामा, हुमायूंनामा, गालिब व बेदिल समेत कई प्राचीन पुस्तकें हैं। 

यह है इनकी संख्या

दुर्लभ ग्रन्थों में खजीनतुल मख तूतात 8 हजार 819, हस्तलिखित ग्रंथों की फोटो कॉपी 233, ट्रांसक्रिप्शन 35, मुसव्वाजात, मुबइय्याजात 18, माइक्रो फिल्म 936 है।



 बेतुल हिकमत में मुंशी खाना हुजूरी (रियासतकालीन प्रशासनिक रिकॉर्ड) 24 हजार 824, अदालत शरीयत (इस्लामिक धार्मिक न्यायालय) 20 हजार 679, इस्तफजात (इस्लामिक निर्णयों का प्रपत्र) 8 हजार 484 शरीयत (दीवानी) 8 हजार 108, मुतफर्रिक (विविध)  एक हजार 206, जिलाधीश कार्यालय से प्राप्त पुस्तकें एक हजार 710 हैं।



 मुद्रित पुस्तकों में संदर्भ पुस्तकें 33 हजार 896, रेफरेंस जनरल (संदर्भ पत्रिकाएं) 18 हजार 694, कैलीग्राफी हस्तलिखित) एवं कलाकृतियां 799, कतबात (शिलालेख) 12, फरामीन व असानीद (राजाज्ञा व प्रमाणित लेख) 722 हैं।



 यह साहित्यिक धरोहर पांचवीं सदी हिजरी से अभी तक के दौर के लेखन, प्रकाशन और उनके अनुवादों पर आधारित है। 

पहले अलग-अलग थे

&संस्थान में मौजूद ग्रंथ व किताबें पहले कई कमरों में रखी गई थी। इन्हें देखने के लिए अलग-अलग जगह जाना पड़ता था, लेकिन अब ये पुस्तकालय में रखी गई है। ऐसे में यहां आने वाले पर्यटकों को सुविधा मिलेगी।

डॉ. सौलत अली खां, 

निदेशक, मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान टोंक। 

rajasthanpatrika.com

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