VIDEO: टोल प्लाज़ा पर सेना की तैनातगी पर भड़कीं ममता, बोलीं- 'स्थिति बेहद गंभीर, आपातकाल से भी खराब'

Patrika news network Posted: 2016-12-02 09:23:34 IST Updated: 2016-12-02 09:23:34 IST
  • मुख्यमंत्री ने कहा, ''सेना हमारी संपत्ति है। हमें उनपर गर्व है। हमें बड़ी अपदाओं और सांप्रदायिक तनाव के दौरान सेना की जरुरत होती है।ज् उन्होंने कहा था च्मैं नहीं जानती कि क्या हुआ है। यदि छद्म अभ्यास है, तब भी राज्य सरकार को सूचित किया जाता है।''

कोलकाता।

   

पश्चिम बंगाल और सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। मामला ममता और केंद्र सरकार के आमने-सामने होने से जुड़ा है।  अभी ममता बनर्जी के विमान की आपात लैंडिंग से जुड़ा मामला सियासी गलियारों में गरमाना शुरू ही हुआ था कि पश्चिम बंगाल में एक और घटनाक्रम ने आग में घी डालने का काम कर दिया। 



ये नया विवाद उस समय उठ खड़ा हुआ जब बंगाल के ज़्यादातर टोल प्लाज़ा में अचानक से सेना की तैनातगी कर दी गई।  टोल प्लाजाओं पर सेना की इस तरह की तैनातगी से सीएम ममता बेहद नाराज़ हो गई हैं, लिहाज़ा अब प्लेन लैंडिंग के साथ ही इस मामले को जोड़ते हुए वे सरकार को घेरने की तैयारी में हैं।    


दरअसल, गुरुवार को बंगाल में टोल प्लाज़ा समेत विभिन्न हिस्सों में आर्मी नजर आई। कई जगहों पर सेना ने डेरा जमाया हुआ था। ममता इसे केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश सरकार को डराने का मामला बताने लगी हैं। जबकि सेना ने इसे अपना अभ्यास मात्र करार दिया है।  



ममता बनर्जी का आरोप है प्रदेश सरकार को सूचित किए बगैर गुरुवार को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या दो पर पलसित और दनकुनी के दो टोल प्लाजा पर सेना तैनात की गई जो अपने आप में बेहद गंभीर मुद्दा है। उन्होंने इसके विरोध करते हुए राज्य सचिवालय में ही डेरा डाल लिया।




सीएम का कहना है कि जब तक इसके सामने स्थित टोल प्लाजा से सेना नहीं हटाई जाती, वह तब तक वहां से नहीं हटेंगी। ममता ने कहा, च्राज्य सरकार को सूचित किए बगैर दो टोल प्लाजा पर सेना तैनात की गई। यह बहुत गंभीर स्थिति है, आपातकाल से भी खराब।ज् इस पर गुरुवार रात तक सेना टोल प्लाजा से हटा ली गई। इसके बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने भी दो ट्वीट करके दावा किया कि राज्य सरकार के सहमति लिए बिना पश्चिम बंगाल के करीब-करीब सभी इलाकों में सेना तैनात कर दी गई है।



सेना ने ये रखा पक्ष 

सेना ने इस पूरे मसले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस तरह का अभ्यास पूरे देश में आर्मी सालाना तौर पर करती रहती है। इस तीन दिवसीय अभ्यास का शुक्रवार को आखिरी दिन था। इसका मकसद यह होता है कि सेना को किसी आपात स्थिति में कितने वाहन उपलब्ध हो सकते हैं। 



रक्षा मंत्रालय के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) ने बताया कि कुछ जगहों से जरूरी आंकड़े जुटा लिए गए हैं और आर्मी को वहां से हटने को कहा गया है। 



एक रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि सेना साल में दो बार देशभर में ऐसा अभ्यास करती है जिसका लक्ष्य सड़कों के भारवहन संबंधी आंकड़े जुटाना होता है। इससे मुश्किल घड़ी में सेना को उपलब्ध कराया जा सके। विंग कमांडर एस. एस. बिर्दी ने कहा, ''चौंकाने वाला कुछ भी नहीं है, क्योंकि यह सरकारी आदेश के अनुसार होता है।''



सेना का कहना है कि इस कवायद से डरने की कोई बात नहीं है और यह सरकार के आदेश के अनुसार ही होता है। वहीं ममता इस मुद्दे पर नरम पड़ती नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा है कि अवसर मिलने पर इस मुद्दे को लेकर मैं राष्ट्रपति से बात करेंगी। 



मुख्यमंत्री ने कहा, ''सेना हमारी संपत्ति है। हमें उनपर गर्व है। हमें बड़ी अपदाओं और सांप्रदायिक तनाव के दौरान सेना की जरुरत होती है।ज् उन्होंने कहा था च्मैं नहीं जानती कि क्या हुआ है। यदि छद्म अभ्यास है, तब भी राज्य सरकार को सूचित किया जाता है।''

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