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Video : सवा दो सौ करोड़ का बजट फूंका फिर भी मेटों को नहीं मिला छह माह से मानदेय

Patrika news network Posted: 2017-07-13 21:16:44 IST Updated: 2017-07-13 21:16:44 IST
  • यह कैसा मैनेजमेंट, जिला परिषद ने मनरेगा पर सवा दो सौ करोड़ रुपए का बजट फूंक दिया लेकिन मेटों को अभी तक छह महीने से मानदेय तक नहीं मिला है।

श्रींगंगानगर।

यह कैसा मैनेजमेंट, जिला परिषद ने मनरेगा पर सवा दो सौ करोड़ रुपए का बजट फूंक दिया लेकिन मेटों को अभी तक छह महीने से मानदेय तक नहीं मिला है। कब तक चलेगा यह फजीँवाड़ा। परिषद से लेकर ग्राम पंचायतों तक अधिकारियों का एेसी मनमर्जी है कि मजदूर को निर्धारित मजदूरी लेने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है। यह कहना था कि मनरेगा मेट यूनियन के पदाधिकारियों का। गुरुवार को जिला परिषद परिसर में मनरेगा मेटों की यूनियन की सभा में वक्ताओं ने राज्य सरकार और परिषद प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वक्ताओं का कहना था कि सरपंच की जगह उनके रिश्तेदार ही ग्राम पंचायतों में नरेगा चला रहे है। निर्धारित मजदूरी 206 रुपए प्रति दिहाड़ी है लेकिन इसकी पालना अभी तक नहीं हो रही है।

इससे पहले पंचायती धर्मशाला में जिलेभर के मेट एकत्रित हुए और वहां से रोष मार्च करते हुए जिला परिषद के मुख्य गेट पर पहुंचे। पुलिस ने एतिहात के तौर पर यह गेट बंद कर दिया। इससे यूनियन पदाधिकारियों और पुलिस के बीच तकरार भी हुइ्र्र। यहां तक कि प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर जाम लगाकर रास्ता रोक दिया। चंद पुलिस कर्मियों पर प्रदर्शनकारी हावी होने लगे तो वहां मौजूद पुरानी आबादी एसएचओ अवधेश सादू ने यू टर्न लेते हुए यह गेट खुलवा दिया। यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रमेश परिहार, जिलाध्यक्ष रजनीश, प्रवीण कुमार, हरीश, बलदेव सिंह, सुरजीत सिंह आदि ने सभा को संबोधित किया और बाद में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्राम मीणा के साथ वार्ता की। इसमें सात दिन में सभी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया गया।

सरपंच की बजाय पिता करता है सरपंची

यूनियन पदाधिकारियों ने सीईओ के समक्ष वार्ता के दौरान कई ग्राम पंचायतों का जिक्र करते हुए हकीकत बयां की। इसमें कई महिला सरपंच की बजाय उनके पति और पिता के अनावश्यक हस्तपेक्ष से निजात दिलाने की मांग की। इस यूनियन का यह भी कहना था कि  श्रीगंगानगर, सादुलशहर, अनूपगढ़, श्रीबिजयनगर, सूरतगढ़ में पिछले छह महीने से मेटों का मानदेय नहीं मिला है। यही हालत निर्धारित 206 रुपए प्रति दिन की मजदूरी की है, यह राशि भी नहीं दी जा रही। गांव मन्नीवाली में 26 मेटों की नियुक्तियों पर सवाल उठाया। वहीं दौलतपुरा में अनटेंड मेटों को लगाने की मंशा साफ करने की मांग उठाई। एेसे में सीईओ ने श्रीगंगानगर और सादुलशहर पंचायत समिति विकास अधिकारियों से मेटों की समस्याओं को निस्तारण करने का आदेश किया।

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