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Video : मैं नहीं करता तो कौन करता , उम्र के पड़ाव में जोशी की बेमिसाल संघर्ष की कहानी

Patrika news network Posted: 2017-06-19 22:56:22 IST Updated: 2017-06-19 22:56:54 IST
  • हाईकोर्ट से शहर में मास्टर प्लान से छेड़छाड़ करने वाले अतिक्रमण को हटाने का श्रेय है 76 वर्षीय बुजुर्ग वेदप्रकाश जोशी को।

श्रीगंगानगर। 


हाईकोर्ट से शहर में मास्टर प्लान से छेड़छाड़ करने वाले अतिक्रमण को हटाने का श्रेय है 76 वर्षीय बुजुर्ग वेदप्रकाश जोशी को। उम्र के इस पड़ाव में बस जिद्द क्या पकड़ी पूरे शहर में कब्जे करने वालों के खिलाफ खुद ही संघर्ष करते हुए पहुंच गए राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर जनहित याचिका के माध्यम से कब्जे साफ कराने के लिए चक्कर लगाने शुरू कर दिए। साक्ष्य जुटाने के लिए करीब नौ सालों के लंबे समय अवधि में अतिक्रमण से जुड़ी 7600 फोटो और अखबारों की 150 खबरों की कतरनें एकत्र की और जीत ली जंग। श्रीगंगानगर की पूजा कॉलोनी में रहने वाले इलैक्ट्रेशियन वेदप्रकाश जोशी एक सामान्य व्यक्ति है, सांस रोग की तकलीफ और मध्यम परिवार होने के कारण अपने रुपए की जरुरतों के बीच संघर्ष का दामन नहीं छोड़ा। आखिर जोशी को पहली जीत सितम्बर 2015 में हाईकोर्ट ने अपने आदेश के माध्यम से की। इसमें हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को आदेश किया कि मास्टर प्लान की पालना कराई जाएं, एेसे में तत्कालीन जिला कलक्टर पीसी किशन ने हाईकोर्ट की पालना कराते हुए अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू कर दिया। इस अभियान में उन प्रभावशाली लोगों के घरों को चिह्नित किया गया जिन्होंने लंबे समय से अपने घर के आगे सड़क हिस्से की भूमि पर चारदीवारियां और चबूतरों से कर रखे थे। इसमें पूर्व मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता राधेश्याम गंगानगर, नगर परिषद सभापति अजय चांडक, नगर परिषद के उपसभापति अजय दावड़ा, जिला कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष और बिहाणी शिक्षा न्यास के अध्यक्ष जयदीप बिहाणी, पूर्व उपसभापति महेश गुप्ता के आवास शामिल थे। इसके अलावा होटल व्यवसायी, बड़े व्यापारी और दुकानदारों के कब्जे साफ हो गए।


पड़ौस में कब्जे ने जलाई अलख

जोशी का कहना है कि वर्ष 2006 में जब उसके पड़ौस में कब्जा हो रहा था तो उसने शिकायत पहले नगर विकास न्यास प्रशासन से की। वहां सुनवाई नहीं होने पर जिला कलक्टर पहुंचा। वहां पूर्व मंत्री और तत्कालीन विधायक राधेश्याम गंगानगर ने नसीहत दी थी कि एेसे कब्जों से टेंशन नहीं लेनी चाहिए, यह बात जोशी के मन में चुभ गई। पड़ौस में तीस फीट का अतिक्रमण को जिम्मेदारों ने हल्के में लिया तो उन्हेांने जनहित याचिका दायर करने के लिए यहां वकीलों के पास सलाह लेने का दौड़ शुरू कर दी। एेसे में जोधपुर जाकर हाईकोर्ट में यह याचिका पेश कर दी, किराये के लिए अपनी पत्नी के जेवर तक बेचने पड़े लेकिन हिम्मत नहीं हारी।


किसी को पहल करनी थी

जोशी बताते है कि मैं नहीं करता तो कौन करता, किसी को यह पहल करनी थी। एक दूसरे के मुंह ताकने की बजाय खुद से शुरू कर दी जाएं तो समस्या को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। जोशी का सपना है कि कब्जा मुक्त हो अपना शहर। इसके लिए वे अब भी चुप नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश की पालना कराने के लिए जिला प्रशासन की अगुवाई में जब अमला ब्लॉक एरिया में तोडफ़ोड़ करने पहुंचा तो इलाके में जोशी के नाम की गूंज सुनाई देने लगी। जोशी से पे्ररित होकर अब तक हाईकोर्ट में 150 जनहित याचिकाएं दायर हो चुकी है। इसमें श्रीगंगानगर ग्रामीण क्षेत्र के अलावा सूरतगढ़, सादुलशहर, श्रीकरणपुर, गजसिंहपुर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़, बीकानेर, हनुमानगढ़ एरिया के लोग हाईकोर्ट में जोशी की याचिका के फैसला पाने के लिए लगे हुए है।

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