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Video: आवारा पशुओ ने मचाया उत्पात, मनमर्जी से मार देते है किसी को भी

Patrika news network Posted: 2017-07-13 11:42:53 IST Updated: 2017-07-13 13:29:12 IST
  • जिला मुख्यालयों पर अवारा पशुओं की टक्कर लगातार बढ़ती दुर्घटनाओं के बाद आखिर प्रशासन जागा और उपखण्ड कार्यालयों पर आवारा पशुओं की रोकथाम के लिए समाधान ढूंढने के लिए बैठक का आयोजन किया।

अनूपगढ़।

आवारा पशुओं के मामले में पूरे जिले में मचे बवाल के बाद आखिरकार प्रशासन जागा और जिला कलैक्टर द्वारा उपखण्ड स्तर पर एवं ग्रामीण क्षेत्र के स्तर पर अलग-अलग कमेटियों को गठन करने सहित प्रमुख लोगों तथा संस्थाओं के प्रतिनिधियों के सुझाव लेकर समाधान के लिए प्रभावी कार्रवाई करने आज बुधवार को उपखण्ड कार्यालय में एक बैठक आयोजित की गई 


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इस बैठक में एस.डी.एम. ने समस्या के सबंध में सुझाव मांगे, जिस पर वर्तमान में संचालित गौशालाओं के संचालकों को क्षमता अनुसार पशुओं को रखने के लिए पाबंद करने, राय सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान के इस्तेमाल की सही रूप से जांच करने, पशुओं के सींगों पर टैग लगाकर उन्हें अलग-अलग गौशालाओं में भिावाने, चारा की व्यवस्था प्रशासन एवं सरकार के स्तर पर करने एवं गांवों से लाकर शहर की सीमा में आवारा पशुओं को छोड़ जाने पर रोक लगवाने की मांग बैठक में उठी। 


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बैठक में क्षेत्रीय गौशाला विकास समिति के जिलाध्यक्ष राधेश्याम बतरा ने एस.डी.एम. को बताया कि अनूपगढ़ क्षेत्र के चक 5 के. के पास एक मुरब्बा जमीन रकबा राज पड़ा है इसको गौशाला हेतु आवंटन के लिए प्रस्ताव सरकार को पूर्व में भेजा हुआ है, वह भूमि गौशाला के लिए अगर आवंटित कर दी जाए तो सभी आवारा पशुओं को एक ही जगह पर रखा जा सकता है। बैठक में सरकार की ओर से दिए जाने वाले अनुदान को लेकर भी काफी मुद्दा गर्माया रहा और मीडिया की ओर से वरिष्ठ पत्रकार भगवानाराम सारस्वत ने कहा कि गौशालाओं के संचालक कह रहे हैं कि उन्हें अनुदान नहीं मिल रहा है तो आखिरकार राय सरकार द्वारा दिया जाने वाला अनुदान कहां जा रहा है? 


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बैठक में इसके अलावा दूधारू पशुओं को भी सडक़ पर खुला छोड़ देने वाले पशु पालकों को जुर्माना लगाने की मांग की गई। बैठक में आवारा पशुओं की समस्या पर जमकर चर्चा की गई। इस बैठक की विशेष बात यह रही कि प्रशासन सरकारी स्तर पर समाधान की बजाए नागरिकों पर अधिक निर्भर होकर रहने की कवायद करता नजर आया।


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