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पुरा महत्व के स्ट्रक्चरों की सुरक्षा भगवान भरोसे

Patrika news network Posted: 2017-06-19 13:21:32 IST Updated: 2017-06-19 13:21:53 IST
पुरा महत्व के स्ट्रक्चरों की सुरक्षा भगवान भरोसे
  • ग्यारहवीं व बारहवीं सदी में यशोधवल व धारवर्ष सरीखे परमार राजाओं की राजधानी रही चंद्रावती नगरी में लाखों रुपए की लागत से खुदाई करवा कर खोले गए पुरातात्विक महत्व के स्ट्रक्चरों की हालत दिन-ब-दिन खस्ता होती जा रही है।

आबूरोड

ग्यारहवीं व बारहवीं सदी में यशोधवल व धारवर्ष सरीखे परमार राजाओं की राजधानी रही चंद्रावती नगरी में लाखों रुपए की लागत से खुदाई करवा कर खोले गए पुरातात्विक महत्व के स्ट्रक्चरों की हालत दिन-ब-दिन खस्ता होती जा रही है। खोले गए स्ट्रक्चरों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध नहीं किए जाने से पिछले साल मानसून में इन स्ट्रक्चरों को काफी नुकसान हो चुका है। इस साल फिर मानसून सिर पर है और बारिश में पुरा महत्व के इन स्ट्रक्चरों को बचाना दिवास्वप्न देखने जैसा है। खुदाई किए इन स्ट्रक्चरों में पानी भरने से पहले ही काफी नुकसान हो चुका है और भविष्य में और अधिक नुकसान होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। बेशक इनमें से अधिकतर स्ट्रक्चरों व शिवपंचायत शैली के टीलों में तब्दील मंदिरों के चारों ओर तारबंदी तो करवाई गई है, पर असामाजिक तत्वों ने इस तारबंदी को भी काफी क्षतिग्रस्त कर दिया है। कुल मिलाकर यह पुरा सम्पदा फिलहाल तो भगवान भरोसे ही है।

सिर्फ एक स्ट्रक्चर पर ही टीन शेड

वर्ष-2013 से 2016 तक तीन चरणों में उत्खनन कर करीब दर्जनभर स्ट्रक्चर खोले गए थे, पर अभी तक एक ही स्ट्रक्चर पर टीन शेड बना हुआ है। शेष सारे खुले पड़े हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017-18 के बजट में पुरातन नगरी चंद्रावती के संरक्षण एवं विकास के कार्यों की घोषणा की तब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे उन पुरातन स्ट्रक्चरों को जीवनदान मिलने की उम्मीद जगी थी, पर अभी तक तो कोई काम नहीं हुआ। फिलहाल तो ये बदहाली का शिकार है।

दरबारियों के आवास, किले के बुर्ज समेत कई

तत्कालीन संस्कृति, जीवन शैली व रहन-सहन के अध्ययन के लिए जब जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में पुरातत्व विभाग ने करीब चालीस लाख रुपए की लागत से उत्खनन कर इन स्ट्रक्चरों को खुलवाया था। इनमें तत्कालीन शासकों के दो किले, किले में निवासरत दरबारियों के आवास, किले के बुर्ज, किले की चारदीवारी, किले का मुख्य द्वार, आम लोगों के आवास अदि के कई स्ट्रक्चर शामिल है। उत्खनन के दौरान इन स्ट्रक्चरों से कई पुरामहत्व की वस्तुएं भी निकली थी, जिनमें से कुछ को तो विभाग के चंद्रावती स्थित संग्रहालय में सुरक्षित रखवाया गया और कुछ सैलानियों के अवलोकन के लिए मौके पर ही रखवाई गई।

सैलानियों को आकर्षित करने में विफल

सैलानियों व पुरातत्व प्रेमियों के लिए ये दर्जनभर स्ट्रक्चर आकर्षण का केन्द्र बने भी, पर विभाग ने इनकी सुरक्षा के लिए महज चारों ओर तारबंदी करवा कर इन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया। बाद में तो सैलानी आने ही बंद हो गए। बदहाली के कारण ही न तो पुरातत्व प्रेमी और न ही सैलानी इन्हें देखने के लिए आकर्षित हो रहे है। विभाग इन स्ट्रक्चरों को आकर्षक बनाकर इन्हें देखने के लिए सैलानियों को आकर्षित करने में सरासर विफल रहा है।

rajasthanpatrika.com

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