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कड़वे प्रवचन: खुशी चाहिए तो हर हाल में जीना सीखो....जानिए आखिर किसने कहा ऐसा...

Patrika news network Posted: 2017-07-09 10:40:14 IST Updated: 2017-07-09 10:40:14 IST
कड़वे प्रवचन: खुशी चाहिए तो हर हाल में जीना सीखो....जानिए आखिर किसने कहा ऐसा...
  • शहर के जैन भवन में शनिवार को चातुर्मास स्थापना का कार्यक्रम भक्ति व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। चातुर्मास कलश की स्थापना के साथ ही आज से शुरुआत की गई।

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राष्ट्रीय संत तरुण सागर ने कहा कि जीवन भर की खुशियां चाहिए तो हर हाल में जीना सीख लो।  एक घंंटे की खुशी के लिए नींद झपकी, एक दिन की खुशी के लिए पिकनिक, एक वर्ष की खुशी के लिए  स्वयं को व्यस्त कर लो, लेकिन जीवन भर की खुशी चाहिए तो हर हाल में जीना सीखना होगा। जीवन में कितने भी कष्ट आए हिम्मत रखो, हमेशा हिम्मत ही काम आएगी। जीवन जीने के लिए जीने के तौर-तरीकों में बदलाव करना होगा। उन्होंने कहा कि जीवन में दुख हर व्यक्ति के जीवन में आता है। भगवान श्री राम श्री कृष्ण आदिनाथ के जीवन में भी दुख आए। हर इंसान ज्ञानी हो या अज्ञानी दोनों के जीवन में दुख जरूर आता है लेकिन ज्ञानी इस दुख से निपट लेता है और अज्ञानी को वह दुख निपटा देता है,खत्म कर देता है। इसलिए जीवन में हर हाल में खुश रहना हमें सीख लेना चाहिए।


मनमुटाव हो, लेकिन बोलचाल बंद मत करो...


संत तरुण सागर ने कड़े प्रवचनों में सीधे तौर पर आत्मज्ञान की बात करते हुए कहा कि व्यक्ति में झगड़ा, मनमुटाव व तकरार किसी भी विषय में हो सकता है, लेकिन ऐसे में आपस में बोलचाल बंद नहीं करना चाहिए। बोलचाल बंद होते ही सुलह के सारे दरवाजे बंद हो जाते है। चातुर्मास का पहला ज्ञान यह है कि जो सोच को बदले किसी में बोलचाल बंद हो तो पहले बोलचाल शुरू करे। बच्चों में भी झगड़ा होता है, उसको लेकर घरों में झगड़ा हो जाता है, लेकिन बच्चे बोलना बंद नहीं करते थोड़ी ही देर में बच्चे एक जगह ही खेलने लगते है। बच्चों को देखकर ही बच्चा बन जाना चाहिए। 




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उन्होंने कहा कि सुनने की आदल डालो चातुर्मास के मूलमंत्र को समझो। सामने वाला भले ही नहीं बदले खुद को बदलने की शुरूआत करो। उन्होंने कहा कि महावीर स्वामी के तेज व उनके विचारों से गाय व शेर एक घाट पर पानी पी लेते थे, लेकिन आप तो केवल अपने विचारों को बदलेंगे तो चातुर्मास में सबकुछ ग्रहण कर लिया। 


चातुर्मास कलश स्थापना के साथ हुआ शुभारंभ 


शहर के जैन भवन में  शनिवार को चातुर्मास स्थापना का कार्यक्रम भक्ति व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। चातुर्मास कलश की स्थापना के साथ ही आज से शुरुआत की गई। संत तरुण सागर जी ने बताया कि चातुर्मास के दौरान 4 माह मुनि एक जगह ही रहते हैं, कहीं अन्य जगह विहार नहीं करते हैं। चार माह तक एक जगह भक्तों के बीच रहकर और उनमें धर्म की  प्रभावना बढ़ाते हैं एवं भक्त भी चार माह तक गुरु का सानिध्य पाकर भक्ति भाव से गुरु की सेवा करते हैं एवं सुबह से शाम प्रतिदिन धर्म का लाभ लेते हैं। 

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