#सूदखोरी : हर गलती मांगती है कीमत और सीकर प्रशासन की इस लापरवाही से फूला यह गोरखधंधा

Patrika news network Posted: 2017-04-20 17:48:07 IST Updated: 2017-04-20 17:48:32 IST
#सूदखोरी : हर गलती मांगती है कीमत और सीकर प्रशासन की इस लापरवाही से फूला यह गोरखधंधा
  • कहते है हर गलती कीमत मांगती है। सीकर जिला प्रशासन की भी एक गलती ने सूदखोरों को पनाह दे दी। यही नहीं सूदखोरी से तंग आकर मलकेडा के एक पति-पत्नी ने जान भी दे दी। लेकिन जिम्मेदार अभी तक नहीं चेते है।

सीकर

कहते है हर गलती कीमत मांगती है। सीकर जिला प्रशासन की भी एक गलती ने सूदखोरों को पनाह दे दी। यही नहीं सूदखोरी से तंग आकर मलकेडा के एक पति-पत्नी ने जान भी दे दी। लेकिन जिम्मेदार अभी तक नहीं चेते है। मामला सीकर जिले में फल फूल रही सूदखोरी से जुड़ा है। दरअसल, सरकार ने जरूरतमंदों को आसानी से पैसा दिलाने के लिए साहूकारी एक्ट बना रखा है। इसके तहत जिला कलक्टर किसी व्यक्ति या संस्था का साहूकारी एक्ट में पंजीयन कर सकता है। लेकिन जिला प्रशासन ने पिछले 13 वर्षों में किसी को साहूकारी एक्ट का लाइसेंस ही जारी नहीं किया। 2004 में सीकर जिले में एक संस्था को साहूकारी एक्ट में लाइसेंस जारी किया गया था।


इसके बाद संस्थान भी लाइसेंस का नवीनीकरण कराने नहीं आया और प्रशासन ने इसकी वजह पता करने की कोशिश नहीं की। इस दौरान सीकर में सूदखोर फलते-फूलते रहे। लोगों की चमड़ी उधेड़ते रहे। पुलिस भी मानती है कि सूदखोरों की वजह से अनेक आत्महत्याएं हुई। फिर भी कभी पुलिस ने यह जांचने की जहमत नहीं की कि आखिर सूदखोर के पास लाइसेंस है अथवा नहीं। हालात यह कि नए नियुक्त कई अफसरों को भी इस कानून की जानकारी नहीं है।


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2004 में जारी हुआ था पहला प्रमाण पत्र


फ्रेंडस क्लब नानी गेट ने वर्ष 2004 में अपर जिला कलक्टर के यहां साहूकारी एक्ट में प्रमाण पत्र लेने के लिए आवेदन किया था। काफी जांच-पड़ताल के बाद तत्कालीन जिला कलक्टर ने संस्था को एक वर्ष के लिए प्रमाण पत्र जारी कर दिया। वर्ष 2005 में संस्थान ने प्रमाण पत्र का नवीनीकरण नहीं कराया।


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स्थायी तौर पर तीन वर्ष के लिए जारी

राजस्थान मनी लॉड्रिंग एक्ट 1963 के तहत साहूकारी एक्ट में सबसे पहले एक वर्ष के लिए अस्थाई तौर पर पंजीयन दिया जाता है। इसके बाद स्थायी तौर पर व्यक्ति या संस्था को तीन वर्ष के लिए पंजीकृत किया जाता है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि संस्था की तीन वर्ष की ऑडिट रिपोर्ट व पुलिस जांच रिपोर्ट के आधार पर यह प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।


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कोई आया भी नहीं पंजीयन कराने


जिला कलक्टर और अपर जिला कलक्टर कार्यालय सूत्रों ने बताया कि सीकर जिले में पिछले 10-12 सालों में साहूकारी एक्ट में पंजीयन कराने के लिए कोई भी व्यक्ति नहीं आया है। पुलिस की सख्ती बढऩे पर पिछले दो-तीन दिनों में कई लोग पूछताछ करने के लिए जरूर आए हैं, लेकिन आवेदन अभी तक किसी ने नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार ज्यादातर साहूकारों को इस तरह के एक्ट व लाइसेंस के बारे में पता भी नहीं है।



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पंजीयन के फायदे को एेसे समझे


हिसाब-किताब का रिकॉर्ड : साहूकारी अधिनियम में प्रमाण पत्र जारी होने से आमजन को फायदे हैं। लाइसेंसधारक को वर्ष में उधार देने वालों की सूची और उनसे वसूली की जानकारी भी हर वर्ष प्रशासन को देनी होती है। एेसे में वह एक सीमा तक ही ब्याज की वसूली कर सकती है। यदि कोई ज्यादा वसूली करता है तो प्रशासन भी उस पर सख्ती दिखाएगा।


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पुलिस को भी राहत

सूदखोरी के तहत इन दिनों जिलेभर में रोजाना सात से दस मामले दर्ज हो रहे हैं। पिछले दिनों मलकेडा में दंपती ने जान दे दी। इस कारण पुलिस भी अपने सारे काम छोड़कर सिर्फ सूदखोरी के मामलों को सुलझाने में लगी है। यदि लोगों को बैंक की तरह साहूकार भी पैसे उधार दे तो राहत मिल सकती है।

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