केन्द्रों तक नहीं पहुंचा बच्चों का पोषाहार, सामने आया बड़ा घोटाला

Patrika news network Posted: 2017-04-21 11:49:18 IST Updated: 2017-04-21 11:49:18 IST
केन्द्रों तक नहीं पहुंचा बच्चों का पोषाहार, सामने आया बड़ा घोटाला
  • आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार में घोटाले का खेल चल रहा है। आरोप भी विभागीय कार्मिक और पोषाहार सप्लाई करने वाले स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) पर लगाया गया है।

सीकर

आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार में घोटाले का खेल चल रहा है। आरोप भी विभागीय कार्मिक और पोषाहार सप्लाई करने वाले स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) पर लगाया गया है। शिकायत के आधार पर जब जांच की गई तो स्थिति भी चौंकाने वाली मिली है।  मौके पर पहुंचे अधिकारियों को ना तो केंद्रों पर वजन के हिसाब से पूरा पोषाहार मिला। ना ही उन पर निर्माण की तिथि और स्वयं सहायता समूह का नाम लिखा मिला। पोषाहार के पैकेट्स प्राप्त किए हुए थे लेकिन, चालान की रसीदें गायब थी। अधिकारी भी उस वक्त हैरान रह गए, जब केंद्र पर मौजूद मिलने वाली महिला कार्मिकों ने पोषाहार सप्लाई करने वाले स्वयं सहायता समूह के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की। एेसे में अधिकारी ये नहीं तय कर पाए कि आखिर पोषाहार आ कहां से रहा है और कौन सप्लाई कर रहा है। 



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56 की जगह 18 पैकेट

धोद परियोजना में संचालित होने वाले आठ आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच में सामने आया कि एक जगह सप्लाई के 56 पोषाहार पैकेट्स की जगह 18 ही मौके पर मिले। एक जगह 58 के बदले 38 पैकेट्स मिले। इन्हें तैयार करने वाले एसएचजी का नाम पता भी गायब था। चालान नहीं किया हुआ था।  930 ग्राम के पोषाहार पैकेट में वजन केवल 750 ग्राम मिला। एक आंगनबाड़ी केंद्र बंद था। वार्ड पंच के अनुसार केंद्र कभी खुलता ही नहीं है। कई केंद्रों पर लंबे समय से पोषाहार नहीं आया हुआ था। कहीं नामांकन के हिसाब से बच्चों की संख्या कम मिली थी। 

बोले अधिकारी...

महिला एवं बाल विकास विभाग के उपनिदेशक दयाशंकर शर्मा का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की शिकायत पर जांच के निर्देश दिए थे। विभागीय काम से जयपुर आया हूं। जांच की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

पत्रिका के पास मौजूद है दस्तावेज


पत्रिका के पास वे दस्तावेज मौजूद है, जिनमें महिला पर्यवेक्षक पर गड़बड़ी करने के तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं। इसके अलावा वे रसीदें भी हैं, जिन प्राप्ति रसीदों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के हस्ताक्षर नहीं हैं। लेकिन, फिर भी केंद्र पर पोषाहार के पैकेट्स डलवाए जाना दर्शा रखा है। 


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पैकेट्स की होगी लैब जांच 


शिकायत के बाद मौके पर पहुंचे अधिकारी ने बताया कि उपनिदेशक के निर्देश पर कई केंद्रों की जांच की है। जिनकी रिपोर्ट बनाकर विभाग के निदेशक को भिजवाई जाएगी। मौके पर मिले बिना अवधी अंकित पोषाहार पैकेट्स बरामद किए हैं। जिनको जयपुर भेजकर लैब में जांच कराई जाएगी। 



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महिला पर्यवेक्षक पर लगे आरोप 


धोद परियोजना की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने महिला पर्यवेक्षक के खिलाफ विभाग के उपनिदेशक को लिखित में शिकायत दी थी। जिसमें उसने अपने केंद्र के रिकार्ड रजिस्टर और फर्जी बिलों की कॉपी प्रस्तुत की। लिखा गया कि केंद्र पर पोषाहार नहीं डालने के बावजूद महिला पर्यवेक्षक ने जबरन  प्राप्ति रजिस्टर में पोषाहार डालना चढ़वा दिया गया। बगैर इंडेन संख्या के पोषाहार प्राप्ति चढ़ाई जा रही है। शिकायतकर्ता ने लगातार पांच महीने तक पोषाहार नहीं आने और बाकी दो-तीन महीनों  में भी चार बार की बजाय एक या दो बार पोषाहार सप्लाई नहीं आने का जिक्र करते हुए पोषाहार के संबंध में पूरी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। जबकि महीने में चार बार पोषाहार की सप्लाई केंद्र पर होना अनिवार्य है। 

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