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पड़ताल: 13 साल से विवादों में रहे नगर परिषद आयुक्त की सामने आई हकीकत, जानिए इस खबर में..

Patrika news network Posted: 2017-07-13 13:35:20 IST Updated: 2017-07-13 13:35:20 IST
पड़ताल: 13 साल से विवादों में रहे नगर परिषद आयुक्त की सामने आई हकीकत, जानिए इस खबर में..
  • एपीओ हुए नगर परिषद आयुक्त भंवरलाल सोनी 13 साल से विवादों में हैं। इसमें तीन बार भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में दर्ज मुकदमे शामिल हैं।

सीकर

 एपीओ हुए नगर परिषद आयुक्त भंवरलाल सोनी 13 साल से विवादों में हैं। इसमें तीन बार भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में दर्ज मुकदमे शामिल हैं। यह जानकारी सूचना के अधिकार के तहत ली जानकारी में सामने आया है। स्वायत्त शासन विभाग भी सोनी के खिलाफ तीन बार अभियोजन स्वीकृति जारी कर चुका है। लेकिन, दो मामलों में राजस्थान उच्च न्यायालय स्थगन आदेश भी दे चुका है। अब फिर से आयुक्त एपीओ हो गए।


इनमें अभियोजन स्वीकृति 


भंवरलाल सोनी 2004 में अधिशाषी अधिकारी के पद पर नगर पालिका हनुमानगढ़ में पदस्थापित थे। आरोप है कि यहां एक भूखंड के मूल आवंटी से मिलीभगत कर पावर ऑफ एटोर्नी के आधार पर नियम विरूद्ध फर्जी कागजातों के आधार पर करीबी रिश्तेदार के नाम लीज डीड जारी करा दी। इस पर राज्यपाल की आज्ञा से स्वायत्त शासन विभाग जयपुर के निदेशक एवं विशिष्ठ सचिव ने अभियोजन चलाने की स्वीकृति प्रदान की थी। यहां एक दूसरे मामले में भी सोनी पर आरोप लगे।





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वर्ष 2015 में सोनी आयुक्त के पद पर नगर परिषद सुजानगढ़ में पदस्थापित थे। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, बीकानेर के तत्कालीन अनुसंधान अधिकारी से विस्तृत विचार विमर्श, रिकार्ड का अध्ययन व ट्रांसक्रिप्ट का अवलोकन करने से प्रथम दृष्टया स्पष्ट हुआ कि सोनी ने एक परिवादी द्वारा निर्मित भवन में किए गए चौथी मंजिल की निर्माण स्वीकृति देने, पूरे भवन की सील खोलने व खांचा भूमि की स्वीकृति के लिए 11 लाख रुपए की मांग की थी। जो कि, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के अंतर्गत प्रथम दृष्ट्या अपराध कारित किए जाने में शामिल पाया गया था।तत्कालीन आयुक्त भंवरलाल सोनी बताते हैं कि कई मामलों में झूठी शिकायत दर्ज हुई थी। इस पर न्यायालय की शरण ली थी। न्यायालय ने इन मामलों में स्टे दिया है। सभी आरोप और शिकायत पूरी तरह निराधार है।

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