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Video : दर्दनाक! शराब...आग...हादसा और फिर उजड़ गई इन बच्चों की जिंदगी

Patrika news network Posted: 2017-03-17 10:51:43 IST Updated: 2017-03-17 11:27:05 IST
  • आग से झुलसकर पहले मां चल बसी। उसकी तेरहवीं के दिन पिता भी जीवन से हार गया। माता-पिता की मौत ने चार बच्चों को बेसहारा कर दिया है।

देवेंद्र शर्मा 'शास्त्री', सीकर

आग से झुलसकर पहले मां चल बसी। उसकी तेरहवीं के दिन पिता भी जीवन से हार गया। माता-पिता की मौत ने चार बच्चों को बेसहारा कर दिया है। अब इनके पास छत ना ही दो जून की रोटी का जुगाड़ है। पढ़ाई जहां थी वहीं ठहर गई। नियती ने यह क्रूरता की है धोद क्षेत्र के अनोखू गांव के नागरमल नट के बच्चों के साथ। नागरमल और उसकी पत्नी संतोष देवी गत 28 फरवरी को घर में ही आग से झुलस गए थे। दोनों को एसके लाया गया, जहां से गंभीर हालत होने पर उन्हें तत्काल जयपुर रैफर कर दिया गया।  जयपुर में संतोषदेवी की उसी रात मौत हो गई। नागरमल 13 दिन तक जीवन और मौत के बीच संघर्ष करता रहा। आखिर 13 मार्च को नागरमल की भी मौत हो गई। परिवार के लोगों का कहना है कि हादसा स्टोव पर सब्जी गर्म करने के दौरान हुआ।  

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परिवार पर कहर का कारण शराब 


इस परिवार पर कहर का मुख्य कारण शराब है। ग्रामीणों ने बताया कि नागरमल पहले खाड़ी में रहता था। लेकिन यहां आने के बाद उसे शराब की लत लग गई। इस बात को लेकर पति-पत्नी में भी अक्सर झगड़ा रहता था। घटना के दिन भी वह शराब के नशे में था। एेसे में स्टोव भभकने के दौरान वह खुद को संभाल नहीं पाया और उसे बचाने के प्रयास में पत्नी की भी जान चली गई। 

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मदद का करेंगे प्रयास 


इस परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। रहने को मकान भी नहीं है। पति-पत्नी की मौत के बाद चारों बच्चों का भविष्य भी अंधेरे में हैं। इन परिवार को राहत देने के सभी प्रयास किए जाएंगे। जिला कलक्टर से मिलकर सरकारी सहायता देने का आग्रह करेंगे। साथ ही गांव के लोग भी मदद करेंगे। 

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कौन बने इनकी छत 


नागरमल और उसकी पत्नी की मौत ने उनके चार बच्चों के जीवन में अंधेरा कर दिया है। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है। इसी के चलते उसके बड़े बेटे सुनील कुमार ने पहले ही स्कूल छोड़ दिया। वह टैंट हाउस पर काम कर परिवार का सहयोग करने लगा। लेकिन अब उस पर तीन भाई बहिन का बोझ आ गया है। उसका छोटा भाई अनिल    (14) नवीं में, बहिन पूजा (13) और सबसे छोटी पूनम (8) गांव की ही सरकारी स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ती है। लेकिन मां-बाप की मौत के बाद इन बच्चों के भविष्य पर संकट के बादल छा गए हैं। हालांकि यही पर इनके साथ उनका चाचा तुलसीराम भी रहता है। बकौल तुलसीराम मैंने भाई और भाभी को बचाने के काफी प्रयास किए। इन बच्चों के लिए भी हर संभव प्रयास करूंगा।  

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