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सीकर: एक खाट पर गुमशुम बैठी जिंदगी, पैरों में पड़ी बेडिय़ां, इस मां के दुख को हर कोई महसूस कर सकता है...

Patrika news network Posted: 2017-07-13 14:01:45 IST Updated: 2017-07-13 14:22:40 IST
सीकर: एक खाट पर गुमशुम बैठी जिंदगी, पैरों में पड़ी बेडिय़ां, इस मां के दुख को हर कोई महसूस कर सकता है...
  • हरे पेड़ की छांव में बसेरा, एक खाट पर गुमशुम बैठी जिन्दगी जीने की आस, पैरों में पड़ी बेडिय़ों से विवश जिन्दगी के दु:ख को हर कोई महसूस कर सकता है।

सीकर

हरे पेड़ की छांव में बसेरा, एक खाट पर गुमशुम बैठी जिन्दगी जीने की आस, पैरों में पड़ी बेडिय़ों से विवश जिन्दगी के दु:ख को हर कोई महसूस कर सकता है। तीन माह से एक ही जगह खाना-पीना जैसे उसकी जिंदगी बन गई है। 


परिवार का एक व्यक्ति हर समय उसके पास मौजूद रहता है। ये स्थिति है पलासरा पंचायत के माधोपुरा निवासी भंवरलाल कुमावत की पत्नी मनोहरी की। बकौल मनोहरी 10 साल से मानसिक वेदना सह रही है। पति भंवर लाल ने काफ ी पैसा इलाज में लगाया। 


यहां तक की जेवरात भी दांव पर लगा दिए। किन्तु कोई फायदा न होने पर उसे सांकलों से बाँधना पड़ा। आर्थिक तंगी से जूझ रहा भंवरलाल रैवासा के बैंक से डेढ़ लाख का किसान क्रेडिट कार्ट पर ऋण भी ले चुका है। ऋण चूकाना तो दूर दो वक्त की रोटी जुटाना इस वक्त भारी पड़ रहा है। राशन का गेहंू भी नहीं मिलता है। भंवर लाल के दो पुत्री व दो पुत्र है। 


पत्नी मनोहरी को दौरा पडऩे से मानसिक स्थिति बिगड़ गई। वह कभी आग लगाती है तो कभी रात में दीवार धोने लग जाती है। अपने ही पुत्र का हाथ तोड़ डाला। पति की अंगुली चबा गई। कभी वह पड़ोसियों पर पत्थर बरसाती है। इस पर न चाहते हुए भी पति ने इसे जंजीर से बांधना ही ठीक समझा। 

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