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#CAMPAIGN: नफरी के अभाव में अटकी पावणों की सुरक्षा, आप भी जानिए अनदेखी का शिकार हमारा हर्ष पर्वत...

Patrika news network Posted: 2017-07-14 12:20:08 IST Updated: 2017-07-14 12:20:08 IST
#CAMPAIGN: नफरी के अभाव में अटकी पावणों की सुरक्षा, आप भी जानिए अनदेखी का शिकार हमारा हर्ष पर्वत...
  • शेखावाटी के सबसे बडे पर्यटक स्थल हर्ष की हरियाली को देखकर पर्यटक खींचे चले आते हैं

सीकर

शेखावाटी के सबसे बडे पर्यटक स्थल हर्ष की हरियाली को देखकर पर्यटक खींचे चले आते हैं, लेकिन वहां पहुंच कर सुविधा नहीं मिलती है। पर्यावरण व वन मंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में हर्ष पर्वत का विकास शामिल है, लेकिन वर्तमान में सुविधा को तरसते हर्ष पर पर्यटकों का जाना भी मुनासिब नहीं है। हर्ष पर्वत पर इन दिनो रोजाना एक हजार से ज्यादा पर्यटक जा रहे हैं लेकिन पर्यटकों की सुरक्षा के  लिए कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। जिला पुलिस ने हर्ष पर्वत पर चौकी तो बना दी लेकिन आज तक कोई पुलिसकर्मी चौकी में नहीं ठहरा। इसके अलावा हर्ष पर्वत पर भी सुरक्षा के लिए लगाए पुलिसकर्मी भी गायब रहते हैं। एेसे में यहां हर समय अनजाने हादसे का खतरा बना रहता है। 


अनदेखी की बानगी, एक साल पहले लगे बोर्ड टूटे 


हर्ष पर बना पुराना शिव मंदिर व अन्य मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन है। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने यहां कई जगह बोर्ड भी लगाए हैं, लेकिन मंदिर के विकास के नाम पर आज तक कुछ भी खर्च नहीं किया गया है। हाल में वन विभाग ने हर्ष पर्वत पर नए साइन बोर्ड तो बना दिए लेकिन अनदेखी के कारण वे बोर्ड भी कई जगह टूट गए।  क्षेत्र में कई जगह बोर्ड पर पॉलीथीन का प्रयोग नहीं करने तथा जानवरों को खाने-पीने का सामान नहीं देने के स्लोगन लिखें है, लेकिन वन विभाग ने आज तक यहां कोई कार्रवाई नहीं की है। जिसका नतीजा है कि यहां स्काउट औसतन हर माह एक से दो ट्रॉली पॉलिथीन व कचरा बाहर निकालते हैं। 




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कहां बैठें, छाया तक नहीं

मंदिर के बाहर लगाई गई लोहे की बेंच को हटा दिया गया है। वन विभाग ने जो शेड बनाए हैं उन पर वन्य जीवों का राज रहता है। इससे पर्यटकों को ठंडी छाया के लिए जगह मिलना तो दूर बैठने के लिए भी स्थान नहीं मिल रहा है। हर्ष पर्वत के दुर्गम रास्ते से पर्यटक किसी तरह पहाड़ी पर बने शिव मंदिर तक पहुंच तो जाते है, लेकिन वहां जाकर भी पर्यटकों को मासूसी होती है। हर्ष निवासी तुलसीराम पुजारी ने बताया कि पुरातत्व और वन विभाग के बीच तालमेल का अभाव होने से विकास कार्य नहीं हो रहे हैं।  

हर साल हादसे, फिर भी नहीं इंतजाम 


चार किलोमीटर खराब है। सामने से दूसरा वाहन आ जाए तो हादसे की संभावना बनी रहती है। हर्ष पर्वत पर 2010 में पहले पहाड़ी से उतरते समय एक जीप अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई थी। हादसे में एक महिला की मौत हो गई थी। जीप को क्रेन की सहायता से निकलवाया गया था। इसी तरह वर्ष 2011 में भैरूजी मंदिर में प्रसाद कार्यक्रम कर लौट रहे ग्रामीणों का ट्रक पलट गया। हादसे में 12 जनों की मौत हो गई थी। 2015 में हरियाणा से आए पर्यटकों की बोलेरो खाई में गिर गई। मई 2016  में हर्ष की वन चौकी से आगे ब्रेक नहीं लगने से दो मोटरसाइकिल फिसल कर खाई में गिर गई। 

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