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ऐसे तो दवा भी कुछ नहीं कर पाएगी, जब तक इस पर अंकुश नहीं लगाएगी सरकार

Patrika news network Posted: 2017-03-18 10:59:32 IST Updated: 2017-03-18 10:59:32 IST
ऐसे तो दवा भी कुछ नहीं कर पाएगी, जब तक इस पर अंकुश नहीं लगाएगी सरकार
  • सरकार मरीजों के उपचार के लिए तो मेडिकल कॉलेज, निशुल्क दवा सरीखी विभिन्न योजनाएं लागू कर रही है लेकिन बीमारी के अहम कारण मिलावट को रोकने के प्रति गंभीर नहीं है।

सीकर

सरकार मरीजों के उपचार के लिए तो मेडिकल कॉलेज, निशुल्क दवा सरीखी विभिन्न योजनाएं लागू कर रही है लेकिन बीमारी के अहम कारण मिलावट को रोकने के प्रति गंभीर नहीं है। इसका नतीजा है कि जिले में पिछले पांच वर्ष के दौरान मिलावट का कारोबार जिस गति से बढ़ा है उस गति से जांच की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसकी बानगी है कि जिले में मिलावट के नमूनों की जांच के लिए  बनी स्थाई प्रयोगशाला को भी सरकार ने  बंद कर दिया। अब मिलावट की जांच करने की जिम्मेदारी दो निरीक्षकों के भरोसे है। इसका नतीजा है कि जिले में खाद्य पदार्थों की जांच मिलावट का माल खपने के बाद ही मिल पाती है। इससे सभी दोषियों के खिलाफ कडी कार्रवाई नहीं हो पाती है।

 

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आकड़ों की जुबानी

विभाग के आंकडों के अनुसार 2016 में महज पांच लोगों को मिलावट पर एक वर्ष का कारावास दिया गया है। जबकि पिछले वर्ष दीवाली पर कुल 58 नमूने लिए गए। जिनमें से दूध, खोआ, पनीर, घी, चाय व सोहन पपडी में मिलावट मिली। इस दौरान पांच नमूने अमानक व पांच मिसब्रांड मिले। जबकि जिले में साढे नौ हजार से अधिक दुकानें व फैक्ट्री संचालित हो रही है। 


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1986 में एफएसएल लैब 


कल्याण अस्पताल में 1986 में एफएसएल लैब बनाई हुई थी। इस लैब में 1994 तक खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच होती थी। जिसमें सीकर व झुंझुनूं जिले के नमूने आते थे। उस दौरान नमूनों की जांच तीन से चार दिन में मिल जाती थी। और दोषियों के खिलाफ एक से तीन वर्ष तक सजा हो जाती थी। जिसे 1995 में बंद कर दिया। 


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निशुल्क लैब भी बंद


2010 से 2012 तक चल प्रयोगशाला जिला रसद अधिकारी के अधीन चलाई थी। जिसमें आम आदमी मिलावट की आंशका पर निशुल्क नमूनों की जांच करवा  सकता था। 

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