संभलकर करें यहां शादी! आपके साथ भी हो सकता है भरतपुर जैसा हादसा, जब जानोगे इन विवाह स्थलों की हकीकत तो खड़ हो जाएंगे रोंगटे

Patrika news network Posted: 2017-05-12 13:31:14 IST Updated: 2017-05-12 13:31:14 IST
संभलकर करें यहां शादी! आपके साथ भी हो सकता है भरतपुर जैसा हादसा, जब जानोगे इन विवाह स्थलों की हकीकत तो खड़ हो जाएंगे रोंगटे
  • भरतपुर में ही नहीं, सीकर में भी शादी की खुशियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जरा सी लापरवाही और प्रकृति का प्रकोप कभी भी इन खुशियों को गम में बदल सकता है।

सीकर

भरतपुर में ही नहीं, सीकर में भी शादी की खुशियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जरा सी लापरवाही और प्रकृति का प्रकोप कभी भी इन खुशियों को गम में बदल सकता है। इसे लेकर ना तो शादी करने वाला परिवार जागरूक है और ना ही जिम्मेदार अधिकारियों को गम के मंडराते बादल दिखाई दे रहे हैं। भरतपुर हादसे के बाद पत्रिका टीम ने सीकर के विवाह स्थलों की व्यवस्था पर नजर डाली तो सामने आया कि यहां तीन दर्जन से अधिक विवाह स्थल बिना पंजीयन के ही चल रहे हैं। पंजीकृत विवाह स्थल पर नियमों की पूरी पालना नहीं कर रहे हैं। इसे लेकर परिषद ने कभी गंभीरता नहीं बरती। परेशान लोगों ने कभी शिकायत की तो महज नोटिस देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।  




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नोटिस में उलझी है कार्रवाई

विवाह स्थलों पर कार्रवाई नोटिसों में उलझी है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रामलीला मैदान स्थित महालक्ष्मी विवाह स्थल के व्यवस्थापक को परिषद की ओर से अब तक नौ नोटिस जारी किए जा चुके हैं। प्रत्येक नोटिस में विवाह स्थल का संचालन बंद कर पंजीयन करवाने की बात कही है। एेसा नहीं करने पर विवाह स्थल को सीज करने की चेतावनी भी दी गई। लेकिन यह सब कागजों में ही है। धरातल पर परिषद ने ना तो इस विवाह स्थल पर कार्रवाई की और ना ही दूसरों पर।




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शहर में 16 पंजीकृत, बाकी अवैध

शहर में 50 से अधिक विवाह स्थल है, लेकिन नगर परिषद के रिकॉर्ड में महज 16 ही पंजीकृत हैं। परिषद ने पंजीकृत करने के बाद इनकी व्यवस्थाओं की कभी जांच नहीं की। जबकि इन विवाह स्थलों में ना तो मापदंडों के अनुसार अग्निशमन यंत्र लगे हैं और ना ही प्रवेश व निकासी के अलग-अलग रास्ते हैं। कचरा संग्रहण और गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था भी अधिकतर विवाह स्थलों में भगवान भरोसे हैं। पार्र्किंग की व्यवस्था पर नजर डाले तो किसी भी विवाह स्थल में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। शादी के दौरान बाहर रास्तों पर लगने वाला जाम इसका बड़ा प्रमाण है। वहीं जिम्मेदार भी इस मामले में चुप बैठे हुए हैं।



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संकरे रास्तों पर भी दे दी स्वीकृति

नियमानुसार विवाह स्थल की स्वीकृति के लिए सड़क की चौड़ाई 40 फीट होना अनिवार्य है। एक हजार वर्गगज से कम क्षेत्र वाले मेरिज हॉल के संबंध में नगर परिषद छूट देकर 30 फीट तक स्वीकृति दे सकती है। लेकिन शहर के कई पंजीकृत विवाह स्थलों के सामने सड़क की चौड़ाई तीस फीट से भी कम है। इसके अलावा मैरिज गार्डन में वाटर हारवेस्टिंग भी बनाना अनिवार्य है, लेकिन इसकी भी पालना नहीं की जा रही है।





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कमजोर सुरक्षा

शहर के विवाह स्थलों में सुरक्षा का दावा भी कमजोर है। अधिकतर में तो सीसीटीवी भी नहीं लगे हैं। उद्योग नगर थाना इलाके में गत सप्ताह दस लाख रुपए नकद व जेवरात की चोरी की वारदात में भी इसकी पोल खुल गई। विवाह स्थल के कमरे की खिड़की पर महज शीशा लगा हुआ था। चोर शीशा तोड़कर नकदी व जेवरात लेकर भाग गया। इस खिड़की पर लोहे के सरिए लगे होते तो यह वारदात बच जाती। 





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संचालकों का यह तर्क

मैरिज होम संचालक रामेश्वर चौधरी व परमेन्द्र शर्मा का कहना है कि ज्यादातर को नियमों की जानकारी नहीं है। ऐसे में नगर परिषद को पहल कर नियमों की जानकारी देनी चाहिए। सुरक्षा संबंधी 16 बिन्दुओं की भी मैरिज होम संचालकों को जानकारी नहीं दी गई।

शहर में 50 से अधिक विवाह स्थल है, लेकिन नगर परिषद में महज 16 का ही पंजीयन है। परिषद जल्द ही सर्वे करवाकर इस संबंध में कार्रवाई करेगी। अवैध विवाह स्थलों को नोटिस देकर सीज किया जाएगा।

जीवणं खां, सभापति नगर परिषद, सीकर

rajasthanpatrika.com

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