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इतनी गर्मी में बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार, आपने भी कभी नहीं देखा होगा बच्चों का ऐसा हाल

Patrika news network Posted: 2017-05-19 15:17:29 IST Updated: 2017-05-19 15:17:29 IST
इतनी गर्मी में बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार, आपने भी कभी नहीं देखा होगा बच्चों का ऐसा हाल
  • दोपहरी में तपते टिनशेड के नीचे बैठे मासूम...। पंखा छोडि़ए, हलक तर करने को पानी तक नहीं...। कुछ ऐसे हालात हैं आंगनबाड़ी केंद्रों पर पढऩे आ रहे बच्चों के। सरकारी और निजी स्कूल के बच्चों को भले ही गर्मी की छुट्टी होने से राहत मिल गई है।

सीकर

दोपहरी में तपते टिनशेड के नीचे बैठे मासूम...। पंखा छोडि़ए, हलक तर करने को पानी तक नहीं...। कुछ ऐसे हालात हैं आंगनबाड़ी केंद्रों पर पढऩे आ रहे बच्चों के। सरकारी और निजी स्कूल के बच्चों को भले ही गर्मी की छुट्टी होने से राहत मिल गई है, लेकिन, आंगनबाड़ी केंद्रों पर अभी भी 40 से 44 डिग्री तापमान में तीन से छह साल तक के बच्चे घर से आने को मजबूर हैं। पत्रिका टीम ने जब आंगनबाड़ी केंद्रों का जायजा लिया तो स्थिति चौंकाने वाली मिली। गर्मी के बीच केंद्रों पर टिनशेड के नीचे नौनिहाल पसीने-पसीने हो रहे थे। हवा के लिए ना तो उनके लिए कोई पंखे की व्यवस्था थी और ना ही कई जगह पीने का पानी रखा हुआ था। केंद्र पर मौजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना था कि धूप में बच्चे बीमार नहीं हो। इसके लिए कईयों ने उन्हें केंद्र पर भेजने से ही मना कर दिया है। इधर, अभिभावकों के अनुसार जब बडे़ बच्चों की छुट्टिया हो गई है तो कुछ समय के लिए गर्मी को देखते हुए छोटे बच्चों को भी अवकाश की राहत मिलनी चाहिए। इधर, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास रहेगा। लेकिन, अवकाश घोषित करना उनके अधिकारों में शामिल नहीं है।





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पानी भी पड़ोस के भरोसे 


पिपराली रोड स्थित एक आंगनबाड़ी केंद्र पर पंखा तो था ही नहीं। पानी पीने के लिए भी बच्चों को पड़ोस में जाना पड़ रहा था। कार्यकर्ता के अनुसार व्यवस्थाओं के लिए अभिभावक भी खरी खोटी सुनाकर जाते हैं। लेकिन, इतने कम किराए में ज्यादा सुविधाएं मिलना शहर में मुश्किल है।





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आधे से अधिक केंद्रों की स्थिति बुरी 


महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिले में 2031 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित होते हैं। इनमें कुछ तो स्कूल व सरकारी भवनों में संचालित हो रहे हैं। कुछ किराए के मकानों में खुले हुए हैं। इनमें आधे से अधिक केंद्र एेसे हैं, जिनकी स्थिति ठीक नहीं हैं और सुविधाआंे का भी अभाव है।





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कलक्टर से मिले संघ पदाधिकारी


अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ एकीकृत की ओर से कलक्टर को ज्ञापन दिया गया है। ज्ञापन में आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों को भी ग्रीष्मकालीन अवकाश देने की मांग की गई है। संघ की अध्यक्ष चंद्रावती दुल्लड़ ने बताया कि भीषण गर्मी में बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। अभिभावक भी गर्मी को देखते हुए बच्चों को केंद्रों पर नहीं भेज रहे हैं। एेसे में सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों की तर्ज पर केंद्रों पर अवकाश स्वीकृत किया जाना चाहिए। ज्ञापन के दौरान मीनू शर्मा, कमला, मणी, उषा धीरवानी, रूकमा देवी उपस्थित थी।





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हवा के लिए खोलना पड़ता है आधा शटर


सीकर शहर में संचालित एक आंगनबाड़ी केंद्र पर बिना पंखे लगे कमरे में बच्चे बैठे हुए थे। घुटन व गर्मी से निजात दिलाने के लिए कार्यकर्ता ने केंद्र का आधा शटर पीछे से खोल रखा था। कार्यकर्ता ने बताया कि विभाग उन्हें 750 रुपए केंद्र का किराया देता है। इतने कम किराए में बच्चों के लिए पंखे की व्यवस्था आखिर कहां से करें।

rajasthanpatrika.com

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