एसके अस्पताल में दवा लेने आए व्यक्ति के साथ घटी ऐसी घटना...

Patrika news network Posted: 2017-04-17 18:22:29 IST Updated: 2017-04-17 18:22:29 IST
एसके अस्पताल में दवा लेने आए व्यक्ति के साथ घटी ऐसी घटना...
  • एसके अस्पताल में आने वाले मरीज स्वास्थ्य व सुरक्षा दोनों की पीड़ा भोग रहे हैं। दवा काउंटरों पर उन्हें पूरी दवा नहीं मिल रही है। उल्टा जेब कटने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हकीकत यह है कि लुटने के बाद परिवादी की सुनवाई पुलिस भी नहीं कर रही है।

सीकर

एसके अस्पताल में आने वाले मरीज स्वास्थ्य व सुरक्षा दोनों की पीड़ा भोग रहे हैं। दवा काउंटरों पर उन्हें पूरी दवा नहीं मिल रही है। उल्टा जेब कटने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हकीकत यह है कि लुटने के बाद परिवादी की सुनवाई पुलिस भी नहीं कर रही है। नतीजन बहाने बनाकर पीडि़त व्यक्ति को ही टरका दिया जाता है। जानकारी के अनुसार दांतारामगढ़ बोलड़ाकाबास की उषा को अस्पताल से सोमवार को डिस्चार्ज किया गया था। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद पति सुशील शर्मा दवा लेने के लिए काउंटर के बाहर कतार में खड़ा था। यहां चार में से दो तरह की दवा मिली। बाकी की दवा बाहर से लाने के लिए ज्यों ही जेब संभाली तो उसमें रखे 3400 रुपए, एटीएम, आधार कार्ड व ड्राइविंग लाइसेंस गायब था। 


सुशील ने बताया कि पहले तो उसने अपने स्तर पर रुपयों की तलाश की। लेकिन, जब नहीं मिले तो दोपहर करीब सवा बजे एसके अस्पताल चौकी में सूचना देने के लिए गया। वहां मौजूद पुलिसकर्मी ने कहा कि शाम को आना, सीसीटीवी कैमरे में फुटेज देखकर कार्रवाई करेंगे। पत्नी को लेकर शाम तक अस्पताल में रुका रहा। शाम को पुलिसकर्मी ने किसी से बात की और यह कहकर टरका दिया कि सुबह 11 बजे से अस्पताल के कैमरे ही बंद पडे़ हैं। एेसे में अब कुछ नहीं किया जा सकता। इधर, पीडि़त व्यक्ति का कहना था कि अच्छे और सस्ते इलाज के लिए यहां आया था। लेकिन, दोनों ही उसे नहीं मिले। बदले में मेहनत की कमाई के रुपए भी हाथ से निकल गए।


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पहले भी हो चुकी है घटनाएं

एसके अस्पताल में जेब तराशी की घटना कोई नई नहीं है। इससे पहले भी मरीज और उनके साथ आने वाले तीमारदारों की जेब यहां साफ हो चुकी है। हालांकि एक बार घटना के दौरान पीडि़त व्यक्ति ने बुर्के वाली महिला को रंगे हाथों पुलिस को पकड़वाया था। जबकि सीसीटीवी कैमरों में आरोपी की पहचान होने के बावजूद पुलिस उन्हें नहीं पकड़ पाती है। कई बार आरोपी के फुटेज कैमरे में आने से वंचित रह जाते हैं।

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