Ad Block is Banned Click here to refresh the page

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे

#CAMPAIGN: आंगनबाड़ी केंद्रों पर समय से नहीं पहुंच रहा पोषाहार का निवाला, बिना पोषाहार कैसे मिटे कुपोषण, आप भी जाने आखिर कैसे सुधरें हालात...

Patrika news network Posted: 2017-07-17 12:44:25 IST Updated: 2017-07-17 12:44:25 IST
#CAMPAIGN: आंगनबाड़ी केंद्रों पर समय से नहीं पहुंच रहा पोषाहार का निवाला, बिना पोषाहार कैसे मिटे कुपोषण, आप भी जाने आखिर कैसे सुधरें हालात...
  • जिले के कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर समय से पोषाहार की सप्लाई नहीं की जा रही है। एेसे में केंद्रों पर आने वाले बच्चों को कुपोषित भोजन नहीं मिल पा रहा है।

सीकर

जिले के कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर समय से पोषाहार की सप्लाई नहीं की जा रही है। एेसे में केंद्रों पर आने वाले बच्चों को कुपोषित भोजन नहीं मिल पा रहा है। जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से तय है कि प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर हर सप्ताह पोषाहार भिजवाया जाएगा। लेकिन, सप्लाई सुचारू नहीं होने पर बच्चों को दलिया, खिचड़ी खिलाकर ही वापस घर भेजना पड़ रहा है। 

आंगनबाड़ी केंद्रों पर तीन साल व छह साल तक के बच्चों को अलग-अलग पोषाहार की मात्रा दी जाती है। इनमें गर्भवती व धात्री महिलाएं भी शामिल हैं। लेकिन,  हालात यह हैं कि एेसे सैकडों आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जिन पर तय समयानुसार पोषाहार नहीं पहुंच रहा है। लक्ष्मणगढ़, पिपराली, रींगस, नीमकाथाना, सीकर शहर व धोद क्षेत्र की कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि महीने में चार या पांच के बजाय तीन या चार बार ही पोषाहार आ रहा है। 




Read also:

#CAMPAIGN: जिले के 250 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे है किराए के मकान में...आखिर कैसे सुधरें हालात




एसएचजी को दे रखी है जिम्मेदारी


विभाग ने केंद्रों पर पोषाहार तैयार कर पहुंचाने की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को सौंप रखी है। लेकिन, विभागीय जांच में भी कई बार सामने आ चुका है कि पोषाहार वजन के हिसाब से कम दिया जा रहा है। कई पैकेट्स पर पोषाहार निर्माण की तिथि का उल्लेख तक नहीं किया जा रहा है। 


डेढ़ सौ बच्चे मिले कुपोषित 


पिछले डेढ़ साल में अकेले एसके अस्पताल में डेढ़ सौ से अधिक कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया जा चुका है। इनमें 16 कुपोषित बच्चे तो एेसे थे। जिनको गंभीर होने पर जयपुर या किसी दूसरी बड़ी जगह रैफर करना पड़ा। शिशु रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे को समय पर पौष्टिक आहार नहीं मिलने से वे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। 

rajasthanpatrika.com

Bollywood