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एक ऐसा गांव : जहां श्याम नहीं 'राम' करते हैं गायों की देखभाल, इनकी ऐसी लगन देख आप भी हो जाओगे...

Patrika news network Posted: 2017-04-13 12:39:32 IST Updated: 2017-04-13 12:39:32 IST
एक ऐसा गांव : जहां श्याम नहीं 'राम' करते हैं गायों की देखभाल, इनकी ऐसी लगन देख आप भी हो जाओगे...
  • 70 वर्षीय राम सिंह का कहना है कि गाय में 24 करोड़ देवी देवता निवास करते हैं और जिस बंदे ने इनकी सेवा को ध्येय बना लिया। उसको कहीं मंदिर और गुरुद्वारा की सीढि़यां चढऩे की जरूरत नहीं है। तारपुरा गांव के पूर्व सरपंच ने गायों की सेवा के लिए अपना घर परिवार तक छोड़ रखा है।

सीकर

गायों की रक्षा और सुरक्षा के लिए भले ही भगवान श्री श्याम का नाम जाना जाता है। लेकिन, तारपुरा का एक राम भी है। जो कि, ग्वाले के रूप में गायों की निशुल्क सेवा कर रहा है। इनकी उम्र भले ही 70 साल हो गई है। लेकिन पिछले सात साल से ये नियमित बेबस और लाचार गायों के लिए 12 घंटे सेवा दे रहे हैं। हालात यह है कि अब तो गौशाला की गायें भी इनको बखूबी पहचानने लगी हैं। जी हां, ये हैं तारपुरा ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच राम सिंह शेखावत। जिन्होंने गायों की सेवा के लिए अपना घर परिवार तक छोड़ रखा है। सुबह आठ बजे गौशाला पहुंचना और दिन ढ़लने के बाद शाम को सात बजे  घर लौटना इनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया है। बतौर राम सिंह का कहना है कि गाय में 24 करोड़ देवी देवता निवास करते हैं और जिस बंदे ने इनकी सेवा को ध्येय बना लिया। उसको कहीं मंदिर और गुरुद्वारा की सीढि़या चढऩे की जरूरत नहीं है। 


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ग्रामीणों को किया इक्ट्ठा, बताई मंशा


गौशाला निर्माण के लिए गांव वालों को इकठ्ठा किया तो वे सहर्ष तैयार हो गए। इसके बाद सबने मिलकर सात साल पहले मनसा माता के नाम से गौशाला को शुरू किया। वर्तमान में यहां साढे़ तीन सौ गाय और सांड हैं। परिवार में पौते और दोहिते सब हैं। लेकिन, 12 घंटे गौशाला में ही गुजरते हंैं। 


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370 बेसहारा गायें हैं गौशाला में


सात साल पहले गांव वालों ने सरपंच की जिम्मेदारी सौंपी थी। सरपंचाई के दौरान आस-पास के गांवों का भ्रमण किया तो महसूस हुआ कि बेदखल गौवंश भी किसान और ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या है। इधर, चारे-पाने की सुविधा के अभाव में लावारिस गाय और सांड भी परेशान हो रहे हैं। 

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