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राजस्थान के सबसे बड़े अस्पताल की दुर्लभ सफलता, अफ्रीकी मरीज का ₹ 2.5 लाख मेें बोन मैरो ट्रांसप्लांट

Patrika news network Posted: 2016-12-01 16:15:49 IST Updated: 2016-12-01 16:15:49 IST
राजस्थान के सबसे बड़े अस्पताल की दुर्लभ सफलता, अफ्रीकी मरीज का ₹ 2.5 लाख मेें बोन मैरो ट्रांसप्लांट
  • चिकित्सा मंत्री राठौड़ ने नाइजीरियाई के बोन मैरो ट्रांसप्लांट करने पर अस्पताल के डॉक्टरों की टीम को दी बधाई। दो करोड़ में रीड़ - तंत्र एक आदमी से दूसरे में स्थानांतरित होता है, यहां केवल ढाई लाख रु. में निपटाया..

जयपुर.

राजस्थान के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल में भले ही अभी तक लीवर ट्रांसप्लांट की राह आसान न हुई हो लेकिन बोन मैरो ट्रांसप्लांट करके यहां मरीजों को नई जिंदगी दी जा रही है। न सिर्फ प्रदेश के बल्कि अब विदेशी मरीज भी यहां बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराने के लिए आने लगे हैं।


हाल ही में अस्पताल के बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट में एक नाइजीरियन मरीज का बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया है। उसके ऑटोलोगस ट्रांसप्लांट हुआ है। इससे अब उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही सवाई मानसिंह अस्पताल भी विदेशी मरीजों के लिए सस्ते इलाज का एक नया डेस्टिनेशन होगा और इससे मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।


अस्पताल की बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट के हैड डॉ. संदीप जसूजा बताते हैं कि नाइजीरिया के रहने वाले मोइनी डेविड (42) के इसी साल जनवरी में मल्टीपल माइलोमा का पता चला था। उसके मुंबई में इस बीमारी के बारे में पता चला था। जब उसने दूसरे देशों में इस बीमारी के इलाज का खर्च पता किया तो वहां करीब दो करोड़ रुपए तक इस बीमारी का खर्चा बताया।


उसके बाद किसी ने जयपुर के एसएमएस अस्पताल का रैफरेंस दिया। यहां उसने बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए डॉ. संदीप जसूजा से सम्पर्क किया। उसका एसएमएस अस्पताल में ढाई लाख रुपए में बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया है। उसके 19 नवंबर को यह ट्रांसप्लांट हुआ। डॉ. जसूजा बताते हैं कि उसके ऑटोलोगस ट्रांसप्लांट हुआ जिसमें उसके शरीर से ही बोन मैरो लेकर ट्रांसप्लांट किया गया है। जल्द ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।


चिकित्सा मंत्री ने दी बधाई :

चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने नाइजीरिया के मरीज का बोन मैरो ट्रांसप्लांट करने पर अस्पताल के डॉक्टरों की टीम को बधाई दी है। साथ ही इस पर खुशी जाहिर की है कि मेडिकल टूरिज्म को बढ़ाने में सरकारी अस्पतालों का योगदान भी बढ़ेगा।


अब तक 42 बोन मैरो ट्रांसप्लांट :

एसएमएस अस्पताल में अब तक 42 बोन मैरो ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। जिसमें 22 ऑटोलोगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए गए हैं। अस्पताल में पिछले आठ-नौ वर्षो से यह बोन मैरो ट्रांसप्लांट हो रहा है।


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