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वही पुराना राग

Patrika news network Posted: 2017-03-15 13:39:10 IST Updated: 2017-03-15 13:39:10 IST
वही पुराना राग
  • इन नेताओं को लगता है कि ईवीएम में गड़बड़ी की जा सकती है। लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को अपनी राय रखने का अधिकार है। लेकिन, सवाल ये कि ये मांग इस समय पर ही क्यों उठाई जा रही है।

मायावती और अखिलेश यादव के बाद अरविन्द केजरीवाल ने चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की जगह बैलेट पेपर के इस्तेेमाल की मांग उठाकर नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस के कुछ नेता भी ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की वकालत कर रहे हैं। 



इन नेताओं को लगता है कि ईवीएम में गड़बड़ी की जा सकती है। लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को अपनी राय रखने का अधिकार है। लेकिन, सवाल ये कि ये मांग इस समय पर ही क्यों उठाई जा रही है। क्या इसलिए कि उत्तरप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने अन्य दलों का सफाया कर दिया? 



यदि हां, तो फिर पंजाब में कांग्रेस दो तिहाई बहुमत के साथ चुनाव जीतने में कैसे सफल रही? बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने चुनाव नतीजे आने के तुरंत बाद ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाते हुए चुनाव रद्द करने तक की मांग कर डाली! 



उत्तर प्रदेश के निवर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस पर सहमति जता डाली। अखिलेश यादव शायद यह भूल गए हैं कि उत्तर प्रदेश में जब चुनाव हुए तो उनकी पार्टी सत्ता में थी और वे इस सरकार के मुखिया थे। 



चुनाव कराने वाले अधिकारी- कर्मचारी व दूसरी सारी मशीनरी भी उनकी ही थी। पांच साल पहले अखिलेश और दस साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में मायावती को इन्हीं ईवीएम मशीनों ने ही चुनावों में विजय दिलवाई थी। 



राजनेताओं और राजनीतिक दलों में चुनाव हारने के बाद धांधली के आरोप लगाने की आदत कोई नई नहीं है। भले ही यह परिपाटी सी बन गई हो लेकिन समूची चुनाव प्रणाली को कठघरे में खड़ा करने की संभवत:  यह पहली घटना है। 



ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगाने वाले नेता प्रमुख राजनीतिक दलों के हैं। ऐसे में चुनाव आयोग को इन आरोपों का गंभीरता से लेना चाहिए। हालांकि चुनाव आयोग मायावती के आरोपों को खारिज कर चुका है। 



ऐसे में जब दूसरे दलों ने भी ईवीएम को कठघरे में खड़ा किया है तो आयोग को चाहिए कि वह सर्वदलीय बैठक बुलाकर शंकाओं को दूर करें ईवीएम  पर सवाल उठाने वाले राजनीतिक दलों को भी चाहिए कि आरोप के समर्थन में कोई सबूत पेश करें। 



हार का ठीकरा ईवीएम पर फोडऩे की बात पहले भी उठ चुकी है लेकिन इस बार मामला बहुत ही गंभीर है लिहाजा इसके निराकरण की दिशा में काम भी चुनाव आयोग को ही करना चाहिए। 



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