पिछड़ों की योजनाओं के लिए 'फंड' ही नहीं!

Patrika news network Posted: 2017-04-20 12:00:10 IST Updated: 2017-04-20 12:00:10 IST
पिछड़ों की योजनाओं के लिए 'फंड' ही नहीं!
  • इस परिस्थिति में सरकार को वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करते हुए यह विस्तार से बताना चाहिए कि दलित व आदिवासी समुदायों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं।

भारत डोगरा

दलित व आदिवासी समुदायों के लिए पर्याप्त संसाधनों को सुनिश्चित करने का एक मुख्य माध्यम था, सरकार द्वारा बनाई गई दो उपयोजनाएं-अनुसूचित जाति उपयोजना व आदिवासी उपयोजना। 



इस वर्ष के बजट में योजना व गैर योजना खर्च को मिला दिया गया है जिससे इन उप योजनाओं की स्थिति अनिश्चत हो गई है। हालांकि सरकारी स्तर पर यह विश्वास दिलाया गया है कि इन उप योजनाओं के अंतर्गत उपलब्ध होने वाले संसाधनों को पहले से और बढ़ाया जा रहा है पर दलित व आदिवासी समुदायों के कार्यकर्ता इस बारे में आशंका जता रहे हैं कि यह वृद्धि कागजी है या वास्तविक? 



चूंकि आंकड़ों व तथ्यों की स्थिति इस वर्ष में बहुत बदल गई है अत: इस बारे में स्थिति बहुत अस्पष्ट है। इस परिस्थिति में सरकार को वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करते हुए यह विस्तार से बताना चाहिए कि दलित व आदिवासी समुदायों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। 



देश में मैला ढोने की प्रथा को पूरी तरह दूर करने के लक्ष्य को व्यापक मान्यता मिली हुई है। इसे अवैध भी घोषित कर दिया गया है। इस स्थिति में जो व्यक्ति पहले इस कार्य में लगे थे व हो सकता है कि कुछ स्थानों पर मजबूरी में आज भी लगे हों, उनके पुनर्वास के लिए पर्याप्त धन की व्यवस्था नहीं हो रही है। 



इस मद पर वर्ष 2013-14 में पैंतीस करोड़ रुपए खर्च किए गए। फिर, अगले दो वर्ष कुछ खर्च ही नहीं किया गया। वर्ष 2016-17 में दस करोड़ रुपए का बजट अनुमान रखा गया जिसे बाद में कम कर एक करोड़ रुपए कर दिया गया। इस वर्ष के बजट में भी मात्र पांच करोड़ रुपए का ही प्रावधान है। 



वर्ष 2016-17 के केन्द्रीय बजट में अनुसूचित जातियों के लिए मैट्रिक से पूर्व की छात्रवृत्ति के लिए 550 करोड़ रुपए का बजट अनुमान प्रस्तुत किया गया था, पर वर्ष 2017-18 के बजट अनुमान में इस छात्रवृत्रि के लिए मात्र 50 करोड़ रुपए का प्रावधान है। 



आदिवासी मामलों के मंत्रालय से जुड़ी स्थाई समिति ने कुछ समय पहले चिंता व्यक्त की थी अधिक कठिन स्थिति वाले या अधिक 'वल्नरेबल' आदिवासी समुदायों के लिए विशेष स्कीम तो बनाई गई है पर इसकी प्रगति ठीक नहीं हो रही है। 



यही स्थिति लघु वन उपज की योजना तथा अनुसूचित जनजाति के छात्रों की उच्च शिक्षा व फैलोशिप की योजना है। इन योजनाओं की प्रगति संतोषजनक न होने के कारण यह बताए गए कि विस्तृत व पूर्ण प्रस्ताव नहीं मिलते हैं, उपयोग के प्रमाण-पत्र व प्रगति रिपोर्ट समय पर नहीं मिलती है। 



अत: स्पष्ट है कि महत्वपूर्ण योजनाओं व उप-योजनाओं के लिए संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धि सुनिश्चित होने तथा उनके समय पर सही उपयोग संबंधी अभी कई सुधार आवश्यक हैं।



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