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यह किसकी खरीद-फरोख्त होने लगी नागौर में

Patrika news network Posted: 2017-06-20 12:29:07 IST Updated: 2017-06-20 12:29:07 IST
यह किसकी खरीद-फरोख्त होने लगी नागौर में
  • शहर में सैकण्ड हैंड तिपहिया वाहनों की खरीद का बाजार नहीं मिस्त्रियों के मार्फत होती है खरीद, फरोख्त, साल भर में तकरीब एक करोड़ से अधिक का हो जाता है कारोबार

नागौर. जिले में सेकण्ड हैंड वाहनों में तीन पहिया वाहनों का भी कोई बाजार नहीं है। खरीद-फरोख्त इसकी मरम्मत करने वालों के मार्फत ही होती है। बाजार नहीं होने के बाद भी  पूरे साल में करीब एक से डेढ़ करोड़ तक का कारोबार हो जाता है। दुकानदारों के मार्फत  माह भर में पूरे जिले में बमुश्किल ही आठ से दस तक आटो ही बिक पाते हंै। यह भी लोगों की

पारस्परिक व्यक्तिगत स्तर की खरीद होती है।

इसमें दुकानदारों की भूमिका केवल वाहन की गुणवत्ता की दृष्टि से ही रहती है। शहर में आटोरिक्शा मरम्मत करने की तकरीबन एक दर्जन से अधिक दुकानें हैं। इनमें से कई के पास आटोरिक्शा के खरीदार एवं बेचने वाले, दोनों ही आते हैं। जान-पहचान के मार्फत ही यहां पर पुराने आटोरिक्शा की खरीद-फरोख्त होती है। पारस्परिक पहचान के आधार पर हुई खरीद में ही कारोबार कई बार एक करोड़ का आंकड़ा भी पार कर जाता है। इस संबंध में दुकानदारों का कहना है कि पूरे शहर में माह भर मेंं तकरीबन एक दर्जन पुराने आटोरिक्शा बिक जाते हैं। एक साल के अंतराल में बिक्री की संख्या का आंकड़ा १०० से ऊपर पहुंच जाता है।

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इंजन नंबर की करते हैं जांच

खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया पूरी होने से पहले मिस्त्री की ओर से आटो के इंजन की जांच के साथ ही उसके कागजातों की जांच कराई जाती है। एक दुकानदार दूसरे दुकानदार को कागज नंबर के आधार पर पता करने के लिए कहता है। इस प्रक्रिया में ही करीब तीन से चार दिन लग जाते हैं। कागज सही निकला तो फिर, खरीद हो गई

दुकानदारों का कहना है कि पुराना आटो खरीदने के लिए ग्राहक की ओर से इच्छा जताने पर वह पहले उसका बजट पूछते हैं। बजट अगर २५-३० हजार तक का हुआ तो फिर उसे १९९८ या इससे पुराने वर्ष के मॉडल का आटो उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं। एक से  डेढ़ लाख तक का बजट हुआ तो फिर उसे वर्ष २०१३ या ०१४ अथवा१५ तक के मॉडल का आटो दिलाते हैं। सब कुछ बजट पर निर्भर रहता है। अगर आपके पास अच्छा बजट है तो फिर आपको एक दो साल पुराना मॉडल भी मिल सकता है।

वाहन बाजारों की दृष्टि से नागौर अन्य जिलों की अपेक्षा सबसे निचले पायदान पर है। यहां पर वाहन बाजारों में दो एवं तीन पहिया वाहनों की कोई जगह नहीं है। अन्य शहरों में जहां अजमेर एवं ब्यावर सरीखी जगहों पर दो से तीन पहिया वाहनों की खरीद के लिए वाहन बाजार सजता है, वहीं नागौर में अभी भी इसके लिए कोई जगह नहीं नजर आती है। इस संबंध में मिस्त्रियों से बातचीत हुई तो उनका कहना था कि बाइक तो सभी चलाते हैं, लेकिन आटो की खरीद हर कोई नहीं करता है। इसलिए इसके लिए कोई बाजार लगाने की जरूरत ही नहीं रह जाती है।

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