कुलपति दशोरा ने एक ही वक्त में अजमेर तक की दो कारों से यात्रा

Patrika news network Posted: 2017-04-21 12:08:23 IST Updated: 2017-04-21 12:11:00 IST
कुलपति दशोरा ने एक ही वक्त में अजमेर तक की दो कारों से यात्रा
  • कुलपति प्रो. पीके दशोरा 9 अगस्त 2016 में कोटा से अजमेर गए थे। वहां एक ही दिन वे महर्षि दयानंद सरस्वती विवि और राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के कार्यक्रम में शामिल हुए

सरकारी यात्राओं के दौरान भत्ते उठाने के लिए नियमों का कैसे उल्लंघन होता है, इसकी बानगी कोटा विश्वविद्यालय में देखी जा सकती है। यहां के कुलपति प्रो. पीके दशोरा 9 अगस्त 2016 में कोटा से अजमेर गए थे। वहां एक ही दिन वे महर्षि दयानंद सरस्वती विवि और राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के कार्यक्रम में शामिल हुए। जब यात्रा बिल की बारी आई तो उन्होंने एक जगह विश्वविद्यालय की अधिकृत कार और दूसरी जगह टैक्सी से आना बताकर बिल उठा लिए। 

समारोह में शामिल हुए

बिल में उन्हें कार नंबर आरजे-20 यूए-3523 यानी ऑफिशियल कार में आना-जाना बताया गया। साथ ही 520 किलोमीटर यात्रा बताई गई है।  सरकारी कार से 4160 रुपए का बिल : विवि में प्रो. दशोरा मानव संसाधन विकास केंद्र में आयोजित समापन समारोह में शामिल हुए। यहां से उन्हें 4160 रुपए का पारिश्रमिक भुगतान दिया गया। विवि की ओर से टीए बिल में 9 अगस्त को सुबह 11 बजे आगमन और रात्रि 12 बजे कोटा के लिए रवानगी बताई गई।  बिल में उन्हें कार नंबर आरजे-20 यूए-3523 यानी ऑफिशियल कार में आना-जाना बताया गया। साथ ही 520 किलोमीटर यात्रा बताई गई है।  

प्राइवेट टैक्सी से 4485 रुपए का भुगतान

प्रो. दशोरा ने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में रिव्यू और नियमित डीपीसी बैठक में भाग लिया। बोर्ड के यात्रा भत्ता बिल में दशोरा को 8 अगस्त को 11 बजे आना और 9 अगस्त को टैक्सी से रवाना होना बताया गया है। बोर्ड से दशोरा को 460 गुणा 9.75 रुपए की दर से 4 हजार 485 रुपए पारिश्रमिक का भुगतान किया गया। 

सरकारी खाते में जमा होती है राशि

विवि अथवा इसके समकक्ष संस्थानों के कुलपतियों को उनके कार्यकाल यानी तीन या पांच वर्ष के लिए वाहन उपलब्ध कराया जाता है। वे इसका उपयोग स्थानीय एवं राज्य के अन्य क्षेत्रों आवाजाही के लिए करते हैं। सरकारी नियमानुसार कुलपतियों को किसी दूसरे संस्थान में कार्यक्रम, संगोष्ठी में आने-जाने पर यात्रा भत्ता मिलता है। यह भत्ता उन्हें अपने विश्वविद्यालय के वित्त विभाग में जमा कराना पड़ता है। अजमेर, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, जयपुर और अन्य शहरों के सरकारी विवि के कुलपति भी सरकारी खातों में राशि जमा कराते रहे हैं। 

कुलपति ने कहा

एेसा नहीं हो सकता कि यात्रा भत्ते को भुनाने के लिए अलग-अलग कारों से यात्रा की हो। हो सकता है बिल बनाते वक्त कार का नंबर गलत लिख दिया हो। मुझे जो भी भत्ता मिलता है, उसे सीधे विवि कोष में ही जमा करा देता हूं। 

प्रो. पीके दशोरा,  कुलपति, कोटा विवि

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