इन दो ग्रहों ने बदला स्थान तो हो गई नोटबंदी

Patrika news network Posted: 2016-11-29 19:09:14 IST Updated: 2016-11-30 00:05:54 IST
इन दो ग्रहों ने बदला स्थान तो हो गई नोटबंदी
  • नोटबंदी के पीछे राजनीतिक हलके व आमजन के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है। घर आंगन से लेकर चाय की थडि़यों व पान की गुमटियों ऑफिसो में इन दिनों बस नोटबंदी की ही चर्चा है। कहीं एटीएम की कतार, कहीं नोटबंदी का असर तो कहीं बैंकों में व्यवस्थाएं और कोई नोट बंदी से होने वाले नफा नुकसान की गणित लगा रहे हैं।

हेमन्त शर्मा

कोट. नोटबंदी के पीछे राजनीतिक हलके व आमजन के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है। घर आंगन से लेकर चाय की थडि़यों व पान की गुमटियों ऑफिसो में इन दिनों बस नोटबंदी की ही चर्चा है। कहीं एटीएम की कतार, कहीं नोटबंदी का असर तो कहीं बैंकों में व्यवस्थाएं और कोई नोट बंदी से होने वाले नफा नुकसान की गणित लगा रहे हैं।

प्रधानमंत्री द्वारा हजार पांच सौ की नोट बंदी को लेकर आप जो भी कयास लगाएं ठीक है, पर इधर जरा ज्योतिष में विश्वास रखते हैं तो न्याय के देवता शनि व शक्ति के कारक मंगल के राशि परिवर्तन ने नोट बंदी करवाई। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 8 नवम्बर की 8 बजे की लग्न कुण्डली पर नजर डालें तो कुछ इसी तरह की बात सामने आई है। आचार्य धीरेन्द्र के अनुसार ग्रहों की चाल किसी ने किसी रूप में जनमानस पर किसी न किसी रूप में असर जरूर छोड़ती है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि अचानक नोटबंदी से जो अव्यवस्थाएं हुई है, वे जल्द सुधरने लगेगी और जनवरी के अंत तक सब कुछ ठीक हो जाएगा।

इस तरह किया शनि व मंगल ने प्रभावित

आचार्य धीरेन्द्र के अनुसार मंगल के शनि की राशि मकर में और शनि के मंगल की राशि वृश्चिक में परिवर्तन के योग ने नोटबंदी करवाई। भारत देश की राशि मकर मानी जाती है। मंगल शक्ति, सत्ता, नेतृत्व का कारक है। शनि धन स्थान का प्रतिनिधित्व करता है। शनि, कुंभ राशि का भी मालिक है। कुंभ भारत की धन भाव की कारक है। 8 नवम्बर की रात 12.38 बजे बुध ने भी अपनी राशि बदली और वृश्चिक में प्रवेश कर लिया। बुध को आर्थिक व्यवस्था का कारक माना गया है। ग्रहों की इन गतियों व इसके प्रभाव में बुध का शनि के साथ संयोग व मंगल परिवर्तन के चलते पुराने नोट बंद हुए और नई व्यवस्था लागू हुई।

इसलिए मिला समर्थन


8 नवम्बर के रात के 8 बजे के लग्न के अनुसार चतुर्थ स्थान में राहू है और इस पर शनि की भी पूर्ण दृष्टि है। इस कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। लेकिन प्रजा का कारक चन्द्रमा दशम स्थान में केतु के साथ है। इसी के कारण आमजन ने इस परिवर्तन को सकारात्मक रूप में लिया।

अब व्यवस्था सुधार की राह पर


आचार्य धीरेन्द्र के अनुसार 20 जनवरी तक मंगल शनि राशि परिवर्तन रहेगा। बाद में 26 जनवरी को शनि राशि बदलकर कर धनु में चला जाएगा, इसी के साथ गाड़ी पटरी पर आ जाएगी। इसके बाद देश की अर्थव्यवस्था उन्नति की ओर बढ़ेगी। शनि व राहू को अव्यवस्थाओं का कारण माना जाता है। यह कालेधन भी कारक है। चूंकि शनि 26 जनवरी 17 के बाद शनि व राहू का संबन्ध विच्छेद हा जाएगा, इससे राहू पर शनि की दृष्टि भी हट जाएगी, यह कालेधन पर अंकुश लगाएगी।

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