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#Campaign: जानिए, किस शहर में रोजाना बिकती हैं दो हजार सैकण्ड हैंड साइकिलें

Patrika news network Posted: 2017-06-16 20:01:46 IST Updated: 2017-06-17 00:32:33 IST
#Campaign: जानिए, किस शहर में रोजाना बिकती हैं दो हजार सैकण्ड हैंड साइकिलें
  • कोचिंग छात्रों की जरूरत और शहर को स्वच्छ रखने की कोशिशों ने कोटा में साइकिलों का क्रेज खासा बढ़ा दिया। शुरुआत में सैकण्ड हैंड साइकिलें बेचने की शुरुआत विज्ञान नगर इलाके से हुई, लेकिन अब पूरे शहर में 100 से ज्यादा दुकानें हैं, जहां रोजाना करीब दो हजार सैकण्ड हैंड साइकिलें बेची जाती हैं।

कोटा.

कोटा में सैकण्ड  हैंड सामान का बड़ा बाजार है। कोचिंग छात्रों की जरूरतों को सस्ते दामों पर पूरा करने के लिए यह बाजार अब कारोबार की शक्ल अख्तियार करने लगा है। इस बाजार का सबसे बड़ा हिस्सा है सैकण्ड हैंड साइकिलों का। यह कारोबार कितना फल-फूल रहा है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि कोटा में हर रोज करीब दो हजार सैकण्ड हैंड साइकिलें बेची-खरीदी जाती हैं। 





देश के दूसरे शहरों में साइकिलों का क्रेज भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन इस मामले में कोटा की बात ही अलग है। यहां के कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले एक लाख से ज्यादा छात्रों की पहली पसंद ही साइकिल है। कुछ छात्र भले ही नई साइकिल खरीदते हों, लेकिन अधिकतर पुरानी साइकिलों पर ही भरोसा करते हैं। यही वजह है कि यहां नई साइकिल बेचने वालों से ज्यादा दुकानें सैकण्ड हैंड साइकिल बेचने वालों की है। खरीदने के साथ ही यहां रोजाना किराए पर भी साइकिल दी जाती हैं। 





विज्ञान नगर क्षेत्र से हुई थी शुरुआत

तलवंडी निवासी बलवंत सिंह व महावीर नगर निवासी हेमन्त छाबड़िया ने बताया कि कोटा में सैकण्ड हैंड साइकिलों का कारोबार विज्ञान नगर, केशवपुरा, तलवंडी व महावीर नगर क्षेत्र में चलता है। सबसे पहले सैकण्ड हैंड साइकिलों के बेचने की शुरुआत विज्ञान नगर क्षेत्र से हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे कोचिंग क्षेत्र बढ़ता गया, वैसे ही साइकिलों का क्रेज बढ़ता चला गया। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब यहां सौ से ज्यादा दुकानों पर रोजाना दो हजार से ज्यादा सैकण्ड हैंड साइकिलें बेची और खरीदी जाती हैं। 



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यहां डाले जाते हैं साइकिलों पर नम्बर 

दुकानदारों ने बताया कि कई स्टूडेंट्स एेसे होते है जो कोचिंगों में छह या आठ माह ही रूकते है। वे अपनी साइकिलें कम दामों में देकर चले जाते है। वह एक साइकिल पर करीब 60 प्रतिशत राशि काटते है। इससे उनका बिजनेस चल निकला। हर साइकिल के चेसिंस व साइकिल नम्बर जारी होते है। उसके बिल बनते है। उसी आधार पर वह साइकिल जारी करते है। यहां हर कम्पनी की अलग-अलग ब्रांड की साइकिलें है। यहां 1200 से लेकर 2 हजार रुपए तक साइकिलें उपलब्ध है। 

rajasthanpatrika.com

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