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कोटा के इस मंदिर में भगवान खुद करते हैं फसल और बरसात की भविष्यवाणी

Patrika news network Posted: 2017-07-11 20:52:36 IST Updated: 2017-07-11 20:52:36 IST
कोटा के इस मंदिर में भगवान खुद करते हैं फसल और बरसात की भविष्यवाणी
  • विश्वास कीजिए या नहीं, लेकिन कोटा के गढ़ पैेलेस स्थित बृजनाथ जी के मंदिर का यही सच है। आज भी यहां ठाकुर जी खुद बताते हैं कि बरसात कैसी होगी, किस फसल की पैदावार अच्छी होगी और कौन सी फसल कमजोर रहेगी।

कोटा.

कोटा के पूर्व राजपरिवार के निवास स्थल गढ़ पैेलेस में बृजनाथ जी का  मंदिर में कोटा के लोगों की अगाध श्रद्धा है। सिर्फ इसलिए नहीं कि यहां ठाकुर जी की सेवा राजपरिवार खुद करता है, बल्कि इसलिए कि यहां आज भी ठाकुर जी कोटा राज्य की सुख-समृद्धि का निर्णय खुद ही करते हैं। हर साल इस मंदिर में बरसात से लेकर फसलों की भविष्यवाणी की जाती रही है। इतना ही नहीं किस फसल की पैदावार अच्छी होगी और कौन सी फसल कमजोर रहेगी यह भी यहां पहले से ही पता चल जाता है। 




इस मंदिर में  वर्षों से धान्य परीक्षण करने की परम्परा निभाई जा रही है। इसी के आधार पर फसल के अच्छी खराब व सामान्य होने का अनुमान लगाया जाता है। राव माधोसिंह म्यूजियम ट्रस्ट के क्यूरेटर आशुतोष आचार्य मानते हैं कि यह कोई ज्ञान-विज्ञान का सवाल नहीं, प्रश्न ठाकुरजी के प्रति आस्था व विश्वास का है।

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एेसे लगाते हैं अनुमान

आचार्य के अनुसार आषाढ़ी पूर्णिमा पर शाम को सूर्यास्त के बाद शयन आरती के बाद प्रमुख तिल, मक्का, ज्वार, धनिया, सोयाबीन, मूंग, उड़द, चावल, मूंगफली व चवला आदि को निश्चित मात्रा में लेकर मंदिर में सफेद कपड़े से ढक कर रख दिया जाता है। अगले दिन मंगला आरती के बाद इनकी दौबारा माप-तोल की जाती है। लोगों की आस्था है कि दूसरे दिन जब भगवान की कृपा से इनकी माप-तोल की जाती है तो इनमें घटत-बढ़त होती है। माना जाता है कि जिस अनाज में तोल में कमी आती है उसकी फसल कम, जिसमें वृद्धि होती है उसकी फसल अच्छी और जिसका वजन वहीं रहता है, उस फसल की पैदावर न ज्यादा होती है न कम।

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150 वर्ष पुरानी परम्परा

बृजनाथ जी के मंदिर में करीब 150 वर्षों से इस परम्परा को निभाया जा रहा है। आशुतोष के अनुसार गढ़ पैलेस स्थित बृजनाथ जी के मंदिर में महाराव भीम सिंह प्रथम के समय से ही यह परम्परा जारी है। उन्हांेने वल्लभकुल सम्प्रदाय को अपना लिया था और वे कृष्ण के अनन्य भक्त थे। इसे यूं भी देखा जा सकता है कि लोगों को भगवान से जोडऩे के लिए यह परम्परा शुरू की गई हो। यहीं आषाढ़ी पूर्णिमा के ही दिन गढ़ की प्राचीर पर वायु परीक्षण कर भी बरसात के अनुमान लगाने की परम्परा भी निभाई जा रही है।

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....तब से छत्रछाया बृजनाथ जी की

गढ़ पैलेस में बृजनाथ जी का मंदिर है। विक्रम संवत 1777 में इस मंदिर का निर्माण कोटा के पूर्व नरेश अर्जुन सिंह ने करवाया। यह कोटा रियासत का मुख्य मंदिर रहा है। मंदिर देवस्थान विभाग के अधीन है। इसमें वल्लभकुल सम्प्रदाय के पुष्टीमार्गीय सम्प्रदाय के अनुसार होती है। जन्माष्टमी के मौके पर पूर्व राजपरिवार के सदस्य अब भी आरती में शामिल होते हैं।

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