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नींद में खलल से मिलेगी आजादी...बस थोड़ा इंतजार और...

Patrika news network Posted: 2017-06-10 08:47:01 IST Updated: 2017-06-10 08:47:21 IST
नींद में खलल से मिलेगी आजादी...बस थोड़ा इंतजार और...
  • एमबीएस और नए अस्पताल में पॉलीसोम्नोग्राफी की स्थापित मशीनों की ट्रायल शुरू हो गई है। एमबीएस के न्यूरोलॉजी विभाग के अधीन लगी इस मशीन में मरीजों की वीडियो ईईजी और स्लीप स्टडी की जा रही है।

कोटा.

एमबीएस और नए अस्पताल में पॉलीसोम्नोग्राफी की स्थापित मशीनों की ट्रायल शुरू हो गई है। एमबीएस के न्यूरोलॉजी विभाग के अधीन लगी इस मशीन में मरीजों की वीडियो ईईजी और स्लीप स्टडी की जा रही है। वहीं नए अस्पताल में टीबी एंड चेस्ट विभाग की मशीन में भी स्लीप स्टडी होने लगी है। 


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डॉ. विजय सरदाना ने बताया कि पॉलीसोम्नोग्राफी को ट्रायल के रूप में स्ट्रोक यूनिट के पास संचालित कर रहे है। कई मरीजों में यह पता नहीं चल पाता है उन्हें मिर्गी का दौरा या अन्य बीमारी है। इस जांच में वीडियो ईईजी की सुविधा भी है। मिर्गी के दौरे होने की पुष्टि इससे हो जाती है। साथ ही दिमाग के किस हिस्से से तरंगें उत्पन्न हो रही है। इसकी भी जांच हो जाती है। 

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एक साथ होगी पांच जगह की मॉनिटरिंग

डॉ. सरदाना ने बताया कि स्लीप स्टडी में नींद कम आना, पैरों में हलचल और खर्राटे की बीमारी ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया (ओएसए) की जांच होगी। इसमें मरीज की सांस कितनी देर रुकती है। हार्ट रेट, ईईजी, ईसीजी और हाथ पैरों की हलचल को रिकॉर्ड किया जाएगा। इसमें दो तरह लम्बे समय में 4 से 12 घंटे और कम समय चार घंटे तक जांच की जाएगी। 


करीब एक हजार रुपए होगा जांच शुल्क

अस्पताल में ट्रायल के दौरान मरीजों की यह जांच की जा रही है। इसके लिए शुल्क तय किया जाएगा। एेसे में जयपुर और अन्य मेडिकल कॉलेजों के बराबर इसका जांच शुल्क रखा जाएगा। एेसे में यह 500 से 1 हजार रुपए के बीच रखा जा सकता हैं। 

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नए अस्पताल में खर्राटे की जांच भी

नए अस्पताल की स्लीप लैब (पॉलीसोम्नोग्राफी मशीन) में सोते समय खर्राटे लेना यानी सांस लेने की प्रक्रिया में अवरोध की जांच हो रही है। टीबी व चेस्ट में सहायक आचार्य डॉ. राजेन्द्र ताखर ने बताया कि सोते समय मरीज की सांस कुछ सैकण्ड के लिए कई बार रुक जाती है, जिससे सांस के साथ आवाज शुरू हो जाती है और दिमाग में ऑक्सीजन जाना बंद होने पर अचानक नींद खुल जाती है। 


इस बीमारी में ब्रेन में ऑक्सीजन की कमी रहने से न्यूरो कैमिकल का बैलेंस बिगडऩा और दूसरी बीमारियां भी हो जाती है। मशीन में मरीज की नींद को आधी रात तक रिकॉर्ड किया जाता है। वहीं इसके बाद की आधी रात में सीपेप मशीन से सांस को नियंत्रित रखने की जांच भी होती है।

rajasthanpatrika.com

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