video: पलक झपकते ही कार से लेकर ट्रेक्टर तक चुरा ले जाते थे...

Patrika news network Posted: 2017-03-06 01:49:34 IST Updated: 2017-03-06 01:50:25 IST
video: पलक झपकते ही कार से लेकर ट्रेक्टर तक चुरा ले जाते थे...
  • कार से लेकर ट्रेक्टर और ट्रक तक चुराने में इन्हें वक्त नहीं लगता था। काम को अंजाम देने के लिए गैंग के हर सदस्य की जिम्मेदारी अलग-अलग थी। रेकी करना, चोरी करना और फिर वाहन को ठिकाने लगाने का काम अलग-अलग सदस्य करते, लेकिन कोटा पुलिस ने इन्हें लक्जरी वाहनों के साथ धर दबोचा।

कोटा.

सुकेत पुलिस ने रविवार को अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर छह वाहन बरामद किए हैं। एसपी कोटा ग्रामीण सत्येन्द्र कुमार ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि गैंग में करीब 15 सदस्य हैं, जो कोटा, झालावाड़ व मध्यप्रदेश के हैं। 


ये रैकी, चोरी और वाहन को बेचने के अलग-अलग कार्यों को अंजाम देते हैं। आरोपितों ने पिछले दो साल में 70-80 वाहनों को चुराना स्वीकारा है। ये चोर मध्यप्रदेश व राजस्थान में रैकी कर वाहन चुराते थे और इन वाहनों को यूपी, हरियाणा, मेवात और भरतपुर की गैंग को बेच देते। उपअधीक्षक रामकल्याण मीणा ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। 


दो माह तक नजर रखी

सुकेत एसएचओ डॉ. रवि सामरिया ने बताया कि वाहन चोरों पर नजर रखने के लिए टीम गठित की हुई थी। एएसआई अजीत मोगा व कांस्टेबल भूपेन्द्र नागर को सूचना मिली कि गत दिनों में हिरियाखेड़ी से चोरी हुई टेवरा के साथ झालावाड़ के नानेरा निवासी यादव सिंह सौंधिया और बिरियाखेडी निवासी दूल्हे सिंह सलावद खुर्द के जंगल में खड़े हैं। घेराबंदी कर दोनों को दबोचा गया। कार्रवाई में हैड कांस्टेबल मुकेश स्वामी, हीरा पूनिया, महिपाल विश्नोई, महिपाल यादव, महेन्द्र, लक्ष्मी नारायण नागर, रामदेव, मुकेश शामिल रहे। 





ये वाहन बरामद किए

पुलिस ने बताया कि इस गिरोह ने गत फरवरी में सात चार पहिया वाहन चुराए थे। इन बदमाशों की निशानदेही पर पुलिस ने पांच वाहनों को बरामद कर लिया है, जिनमें मध्यप्रदेश के गुराडिया बंगला, गोघटपुर, झालावाड़ के बाघेर व मिश्रोली, कोटा जिले के हिरियाखेडी, सुकेत कस्बे से ट्रैक्टर व कार को चुराना स्वीकारा है।

तीन हिस्सों में गैंग

1. रैकी करने वाले

गिरोह में पहले रैकी करने वाले थे। इनकी निशानदेही पर ही वाहन चुराए जाते थे। इनमें अतरालिया सुकेत निवासी रणजीत सिंह, बालु सिंह सारसी एमपी, मेहरबानसिंह सालरिया, प्रतापसिंह लीलाखेड़ी, भगवान देवरी, कमल तीतरी, रामबाबु बरखेड़ा निवासी हैं।

2. चुराने वाले

वाहन चुराने का काम दूल्हे सिंह, मुकेश कंजर, विनोद कंजर, बाबू कंजर, रमेश कंजर, गजरा कंजर और इलकार सिंह करते।


3. चोरी के वाहनों की बिक्री

चोरी के वाहन बेचने के काम में कोटा निवासी मकसूद अहमद, देवेन्द्र उर्फ  गोपाल, मुश्ताक उर्फ  आशिक पठान और बारां के अबरार उर्फ शाकिर शामिल हैं। चोरी के वाहन छुपाने का काम सुकेत निवासी रणजीत सिंह करता था। 


चोरी के भी तीन तरीके

1. किस्त बकाया तो मालिक से खरीद लेते

चोरी में ये गिरोह एेसे वाहन भी खरीद लेता, जिनकी किस्त बकाया है। एेसे वाहन ये गिरोह सस्ते में खरीद लेते। मालिक चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवाता और बीमा उठा लेता।

2. पुराने कागज पर नई गाड़ी बेचना

ये गिरोह कंडम वाहनों के कागजात खरीद लेते। इसके बाद नई गाड़ी चुरा उसमें पुराने वाहन के चेचिस व इंजन डाल कर बेच देते।

3. रैकी कर चुराना

दोनों प्रदेशों में वाहनों की रैकी करते और दूसरी गैंग के सदस्यों को सूचना देकर उन्हें चुरा लेते।

कंटेनर में भेजी गाडि़यां

पुलिस पड़ताल में आया है कि चोरी की सभी गाडि़यों को कोटा से ही रवाना किया जाता रहा है। बड़े कंटेनर में चोरी की गाडि़यों को लोडिंग कर भेजते थे, ताकि बिना परेशानी के डिलीवरी के स्थान पर पहुंचाया जा सके। इसमें भोपाल और एमपी के दूसरे शहरों से चुराए वाहनों को भी कोटा होकर ही भेजा गया है। 

rajasthanpatrika.com

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