#बिजली_के_झटके: रात को गुल हुई बिजली दोपहर में आई

Patrika news network Posted: 2017-05-14 18:10:03 IST Updated: 2017-05-14 18:44:16 IST
#बिजली_के_झटके: रात को गुल हुई बिजली दोपहर में आई
  • दोपहर के एक बजने को हैं। घर में एक बूंद भी पानी नहीं है। रात में गुल हुई बिजली अब तक नहीं आई। घरों में खाना नहीं बना, महिलाएं हाथों में बर्तन लेकर पानी भरने के लिए ट्यूबवैल पर खड़ी हैं। इंतजार है कि कब बिजली आए और कब जरूरी काम निपटाए जाएं।

कोटा.

दोपहर के एक बजने को हैं। घर में एक बूंद भी पानी नहीं है। रात में गुल हुई बिजली अब तक नहीं आई। घरों में खाना नहीं बना, महिलाएं हाथों में बर्तन लेकर पानी भरने के लिए ट्यूबवैल पर खड़ी हैं। इंतजार है कि कब बिजली आए और कब जरूरी काम निपटाए जाएं। 



 इसी दौरान एक ग्रामीण ने सूचना दी कि बिजली विभाग में बात हो गई... 15 मिनट में बिजली आने वाली है। यह सुनते ही सबके चेहरे खिल उठे। टयूबवैल के आसपास हलचल बढ़ गई। थोड़ी देर बाद बिजली चालू हो गई और टयूबवैल से पानी भी। एक एक कर महिलाओं ने बर्तनों में पानी भरना शुरू कर दिया। यह हालात किसी दूरदराज के गांव के नहीं है, कोटा शहर से मात्र 10 किमी दूर नगर निगम सीमा में शामिल उम्मेदगंज के हैं।





यहां के लोग दिन में कई बार बिजली बंद होने से इतने परेशान है कि उन्हें बिना बिजली के पानी भी नसीब नहीं होता। उम्मेदगंज ही नहीं... नगर निगम सीमा में शामिल 35 गांवों व जिले के अन्य गांवों में भी कमोबेश यही स्थिति है। गांवों में अघोषित बिजली कटौती हो रही है, लोग पेड़ों के नीचे बैठकर दोपहरी काट रहे हैं। जरा सी तेज हवा चली कि बिजली गुल हो जाती है और फिर कब चालू होगी, कुछ कहा नहीं जा सकता।


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बंद पड़े है सुलभ शौचालय

उम्मेदगंज गांव में दो सुलभ शौचालय है, लेकिन दोनों बंद पड़े हैं। गांव में बिजली की आंख मिचौली के चलते ट्यूबवैल नहीं चलते और शौचालयों की टंकियों में पानी नहीं भरता। एेसे में लोगों को खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक शौचालय तो जब से बनकर तैयार हुआ है, तभी से उस पर ताला लगा है। इसे आज तक नहीं खोला गया।


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कुछ ही घरों में पहुंचा पानी

उम्मेदगंज गांव को मिनी अकेलगढ़ परियोजना के तहत जलापूर्ति में शामिल किया गया था। पूर्व कांग्रेस सरकार के समय यहां इस परियोजना के तहत कुछ हिस्से में पाइपलाइनें भी बिछाई गई और इसी क्षेत्र को रायपुरा स्थित उच्च जलाशय से जोड़ दिया गया। बाकी हिस्से के लोगों से जलदाय विभाग के अधिकारियों के साथ आए कॉन्ट्रेक्टर फर्मों के लोगों ने नल कनेक्शन देने के लिए राशि भी जमा करवा ली, लेकिन आज तक यहां न तो पाइप लाइनें बिछी और न ही घरों में नल कनेक्शन हुए। मात्र 25 फीसदी परिवारों में पानी के कनेक्शन है तथा शेष आबादी को पानी के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

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