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#बिजली_के_झटके: कभी भी गुल हो जाती है बिजली

Patrika news network Posted: 2017-05-12 22:53:07 IST Updated: 2017-05-12 22:53:20 IST
#बिजली_के_झटके: कभी भी गुल हो जाती है बिजली
  • कोटा संभाग पूरे राज्य में 'बिजली हब' के रूप में जाना जाता है। दुनियाभर के बिजलीघरों में बिजली उत्पादन के लिए जिन-जिन फ्यूल का उपयोग होता है, लगभग उन सभी से चलने वाले बिजलीघर कोटा संभाग में मौजूद हैं। इसके बाद भी यहां के लोगों को बिजली कटौती की भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

कोटा.

जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में रात में बिजली गुल होने की समस्या आम है। जिन इलाकों में बिजली गुल होती है, वहां के लोग शिकायत दर्ज कराने के लिए जिम्मेदारों को फोन करते हैं, लेकिन हर बार उन्हें रेस्पांस नहीं मिलता। 





कोटा में बजरंग नगर, तलवंडी सहित कई इलाकों से देर रात बिजली गुल होना आम बात है। जिले के लुहावद स्थित 33 केवी स्टेशन से जुड़े करीब 20 गांवों में 15 दिन से अघोषित विद्युत कटौती की जा रही है। ग्रामीणों की ओर से इस बारे में जनप्रतिनिधियों को भी कई बार बताया जा चुका है, लेकिन समस्या का नहीं हुआ। इस बारे में जिला कलक्टर रोहित गुप्ता ने बताया कि बिजली की समस्या के निस्तारण का प्रयास करेंगे। शहर में बिजली गुल होने की समस्या में सुधार नहीं आ रहा है तो निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों को बुलाकर बात करेंगे।



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घर में अंधेरा, प्रदेश को कर रहे रोशन 

कोटा, (कालीसिंध) झालावाड़ और छबड़ा (बारां) में आरवीयूएनएल के कोयला आधारित बिजलीघरों की ही बिजली उत्पादन क्षमता 3540 मेगावाट है, जो राज्य की प्रतिदिन की बिजली खपत का 65 फीसदी है। कोयला आधारित बिजलीघरों के अलावा अंता (बारां) में गैस आधारित एनटीपीसी प्लांट, रावतभाटा में परमाणु बिजलीघर तथा जवाहर सागर और राणाप्रताप सागर पन बिजलीघरों से भी करीब 1000 मेगावाट बिजली राज्य को मिल रही है। इस हिसाब से कोटा संभाग राज्य में प्रतिदिन की बिजली खपत की 80 फीसदी बिजली उपलब्ध करा रहा है।

rajasthanpatrika.com

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