'ग्राम' से पहले महाराष्ट्र में राजस्थान एग्री टूरिज्म की धूम

Patrika news network Posted: 2017-05-20 07:58:04 IST Updated: 2017-05-20 07:58:04 IST
'ग्राम' से पहले महाराष्ट्र में राजस्थान एग्री टूरिज्म की धूम
  • विश्व कृषि पर्यटन दिवस के मौके पर गांवों की सांस्कृतिक विरासत, खेती-किसानी की समृद्धता और नवाचारों को साझा करने के लिए यूएनडब्ल्यूटीओ और एनएटीसी ने नेशनल एग्री टूरिज्म कॉन्फ्रेंस आयोजित की। जिसमें जुटे एग्री टूरिज्म प्रमोटर्स को डॉ. अनुकृति शर्मा ने राजस्थान के कृषि पर्यटन से रूबरू करवाया।

कोटा.

कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा... महज एक सवाल का जवाब जानने के लिए भीड़ सिनेमाघरों में उमड़ पड़ी और  तामझाम वाले प्रमोशन के बिना ही फिल्म ने सबसे ज्यादा कमाई करने का रिकॉर्ड बना डाला... लेकिन, इससे भी बड़ा सवाल बन जाता है सेहत, घुमक्कड़ी और सुकून की साझा तलाश। इसका जवाब बनकर उभर रहा  है राजस्थान का  एग्री टूरिज्म। वह भी ज्यादा रोमांच के साथ कम कीमत पर। फिल्म निर्माताओं की तरह राजस्थान के   किसान भी मालामाल हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए जरूरत है इन  खूबसूरत गांवों से देश-दुनिया को रूबरू करवाने की। जिस काम को  यूनाइटेड नेशन वर्ल्ड टूरिज्म ऑर्गेनाइजेशन (यूएनडब्ल्यूटीओ) और राष्ट्रीय कृषि पर्यटन परिषद (एनएटीसी) जैसे संगठन आसानी से कर सकते हैं।



विश्व कृषि पर्यटन दिवस के मौके पर गांवों की सांस्कृतिक विरासत, खेती-किसानी की समृद्धता  और नवाचारों को साझा करने के लिए यूएनडब्ल्यूटीओ और एनएटीसी ने 16 मई को मुम्बई में नेशनल एग्री टूरिज्म कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया था। जहां देशभर से जुटे एग्री टूरिज्म प्रमोटर्स को  यूजीसी की रिसर्च एवार्डी एवं कोटा विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुकृति शर्मा ने राजस्थान में तेजी से उभरते  कृषि पर्यटन से रूबरू करवाया। जब उन्होंने मरुभूमि पर हो रहे ऑर्गेनिक फॉर्मिंग से लेकर ओलिव, मेंहदी, संतरे, चावल की विलुप्त प्रजातियों  और  मोतियों की खेती जैसे नावाचारों के बारे में लोगों को बताया तो वो हैरत में पड़ गए। उन्होंने डूंगरज्या, मंडावा और कोटा की केस स्टडी के जरिए बताया कि किस तरह  राजस्थान के गांवों में सेहत के लिए स्वच्छ वातावरण, घुमक्कड़ी के लिए खूबसूरत और ऐतिहासिक ठिकाने ही नहीं महानगरीय ऊब को खत्म करने वाली जीवंत  संस्कृति देशी-विदेशी पर्यटकों का मन मोह रही है। 



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करनी होंगी कमियां दूर

डॉ. शर्मा ने कहा कि इन सबके बावजूद संसाधनों और जागरूकता की कमी की वजह से अभी उम्मीद के मुताबिक टूरिस्ट गांवों तक नहीं पहुंच रहे। सरकार और कृषि संगठनों को अच्छे फार्म हाउस को चिह्नित कर टूरिस्ट पोर्टल पर वर्चुअल टूर दिखाने होंगे। किसानों का पूल बनाकर टूर प्लान करने के साथ ही  फॉर्म पर उपलब्ध चीजों की कई भाषाओं में जानकारी देने के लिए ऑडियो-वीडियो कैप्सूल बनाने होंगे। स्वस्थ वातावरण में सुकून और मनोरंजन की तलाश सबसे ज्यादा  गर्भवती महिलाओं, बुजुर्ग और बीमार लोग को होती है, इसलिए व्हील चेयर जैसी छोटी-छोटी चीजें जुटाकर उन्हें हिल स्टेशन की ओर जाने की बजाय गांवों में आकर्षित करना होगा।



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बदलनी होगी मार्केटिंग स्ट्रेटजी 

डॉ. शर्मा ने एग्री टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए मार्केटिंग स्ट्रेटजी बदलने पर जोर दिया। उन्होंने ओमनी चैनल के जरिए मल्टी प्रमोशन, रिवर्स मार्केटिंग के जरिए पर्यटकों से सीधे रिश्ता कायम कर लो कॉस्ट पर हाई इम्पेक्ट लेने और गुरिल्ला मार्केटिंग के जरिए किसानों के नावाचारों को ब्राण्ड के तौर पर पेश करने की बात कही। इस दौरान महाराष्ट्र के पर्यटन मंत्री जयकुमार रावल, कृषि राज्य मंत्री सदाभाऊ कोठ और एग्री टूरिज्म के एमडी पांडुरंग तांवड़े आदि लोग मौजूद रहे।

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