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कोटा थर्मल प्लांट पर छाए तालाबंदी के बादल, छह इकाइयों में बंद हुआ काम

Patrika news network Posted: 2017-03-20 21:02:08 IST Updated: 2017-03-20 21:27:06 IST
कोटा थर्मल प्लांट पर छाए तालाबंदी के बादल, छह इकाइयों में बंद हुआ काम
  • राज्य सरकार ने कोटा थर्मल की हालत खस्ता कर दी है। प्लांट को बिजली की मांग कम होने का हवाला देकर लगभग पूरा तरह ठप कर दिया है। 1240 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता और सात इकाइयों वाले कोटा थर्मल में वर्तमान में मात्र एक इकाई से महज 195 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है।

कोटा.

सूरज की तपन बढ़ रही है। घरों में कूलर-पंखे चल पड़े हैं, लेकिन बिजली की मांग कम हो गई है। यह बात भले ही किसी के गले नहीं उतरे, लेकिन स्टेट लोड डिस्पेच सेंटर (एलडी) के आदेश यही कह रहे हैं। राज्य सरकार ने कोटा थर्मल की हालत खस्ता कर दी है। प्लांट को बिजली की मांग कम होने का हवाला देकर लगभग पूरा तरह ठप कर दिया है।

1240 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता और सात इकाइयों वाले कोटा थर्मल में वर्तमान में मात्र एक इकाई से महज 195 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। एक तरफ कोटा थर्मल के श्रमिकों से लेकर कर्मचारियों तक, अभियंताओं से लेकर अधिकारियों तक इस बिजलीघर को बचाने के लिए लम्बे समय से संघर्ष कर रहे हैं। धरने-प्रदर्शन कर रैलियां निकाल रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी कोटा थर्मल उपेक्षा का शिकार हो रहा है। थर्मल की 5 इकाइयां करीब 10 मार्च से बंद हैं। अब गर्मी बढऩे से उम्मीद थी कि इकाइयों को चालू करवा दिया जाएगा, लेकिन बंद इकाइयों को चालू करवाने की जगह उत्पादन कर रही 195-195 मेगावाट की छठी व सातवीं इकाई में से छठी इकाई को भी बंद करवा दिया गया।

बिजलीघर के ठप होने का दिखने लगा असर

प्लांट में लम्बे समय से पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन नहीं होने तथा अब प्लांट लगभग ठप पड़ा होने का असर भी दिखाई देने लगा है। कर्मचारी, अधिकारी व श्रमिक ठाले बैठे हैं। ठेकेदार फर्मों ने श्रमिकों को रेस्ट दे दिया है, कोयला नहीं जलने से फ्लाईएेश भी नहीं बन रही। सीमेंट कंपनियों के टेंकर खाली खड़े हैं, ब्रिक्स व टाइल्स उद्योगों तक में फ्लाईएेश की कमी पैदा हो गई है।

इस समय रखरखाव की भी नहीं मिलती थी अनुमति

एक दौर था जब कोटा थर्मल की इकाइयों को जरूरत होने के बावजूद मार्च से जून तक की अवधि में रखरखाव की भी अनुमति नहीं मिलती थी। एलडी की ओर से निरंतर बिजली उत्पादन चालू रखने के निर्देश दिए जाते थे। अभियंताओं को इकाई में गड़बड़ी होने के बावजूद उसमें निरंतर बिजली उत्पादन बनाए रखने की चुनौती मिलती थी और यहां के अधिकारी व कर्मचारी इस चुनौती को स्वीकार करते हुए सरकार की उम्मीदों पर खरा उतरते थे। आज हालत यह है कि मार्च के अंत में प्लांट की सात में से छह इकाइयां बंद करवाई हुई है।

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