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#प्यासा_अस्पतालः दान दाताओं को ठीक कराने पड़ते हैं वाटर कूलर

Patrika news network Posted: 2017-04-19 22:51:38 IST Updated: 2017-04-19 22:59:30 IST
#प्यासा_अस्पतालः दान दाताओं को ठीक कराने पड़ते हैं वाटर कूलर
  • एमबीएस हॉस्पीटल, जेके लोन और नया अस्पताल प्रबंधन दान में मिली चीजें तक संभाल कर नहीं रख पाता। तीनों अस्पतालों में लगभग सभी वॉटर कूलर किसी ना किसी भामाशाह ने दान में दिए हैं, लेकिन जब यह खराब होते हैं तो अस्पताल प्रबंधन इन्हीं दानदाताओं पर ठीक कराने की जिम्मेदारी डाल देता है।

कोटा.

एमबीएस हॉस्पीटल, जेके लोन और नया अस्पताल प्रबंधन दान में मिली चीजें तक संभाल कर नहीं रख पाता। तीनों अस्पतालों में लगभग सभी वॉटर कूलर किसी ना किसी भामाशाह ने दान में दिए हैं, लेकिन जब यह खराब होते हैं तो अस्पताल प्रबंधन इन्हीं दानदाताओं पर ठीक कराने की जिम्मेदारी डाल देता है। ऐसा ना करने पर इन्हें कबाड़ में फैंक दिया जाता है।



कोटा के भामाशाहों ने तीनों अस्पतालों को वाटर कूलर दान में देकर सरकार और अस्पताल प्रबंधन का लाखों रुपए का खर्च बचाया, लेकिन अस्पतालों में इस कदर अराजकता हावी है कि इनके खराब होने पर ठीक कराने का भी खर्च उठाने को राजी नहीं है। कैथून निवासी प्रदीप मालव बताते हैं कि उन्होंने दो साल पहले अपने बेटे आकाश की स्मृति में जेके लोन अस्पताल को वाटर कूलर दान किया था। कुछ दिन बाद जब वह अस्पताल गए तो वाटर कूलर बंद पड़ा था। जैसे तैसे उसे चालू करवाया, लेकिन छह महीने बाद पता चला कि उसका कंप्रेसर जल गया है। जिसे अस्पताल ने ठीक नहीं करवाया तो खुद ही दस हजार रुपए खर्च कर ठीक करवाया, लेकिन कुछ दिन बाद इसे अस्पताल प्रबंधन ने फिर बंद करवा दिया। वह बोले 'अस्पताल के इस रवैये से मुझे खासी ठेस पहुंची और मैने वॉटर कूलर वापस मांगा, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ना तो इसे वापस कर रहा है और ना ही चालू।'



खुद ही कर रहे देखभाल 

महावीर नगर विस्तार योजना निवासी निर्मला गालव ने पिछले साल अपनी मां की स्मृति में नए अस्पताल को एक लाख रुपए की कीमत का वाटर कूलर दान किया। अब हालत यह है कि उसकी देखभाल करने के लिए उनके पति देवकी नंदन गालव को को खुद जाना पड़ता है। अव्यवस्था के कारण वाटर कूलर आए दिन खराब हो जाता है। जिसे ठीक करने का काम भी उन्हें एक मिस्त्री को सौंपना पड़ा है, लेकिन इस सबके बाद भी अस्पताल प्रबंधन कभी भी वाटर कूलर खराब होने या बंद करने की जानकारी उन्हें नहीं देता। इस काम के लिए उन्हें नियमित अस्पताल जाना पड़ता है। इसी 29 मार्च को उन्होंने वाटर कूलर की सफाई करवाई और आरओ भी ठीक करवाया है।

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अस्पताल से अच्छा स्कूल

जेसीआई सुरभि ने वर्ष 2015 में एमबीएस हॉस्पीटल में दो वाटर कूलर और आरओ लगवाए थे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन साल भर भी इनकी देखभाल नहीं कर सका। संस्था की रोहिणी कोहली का कहना है कि एक साल के लिए तो हमने ही मेंटिनेंस का कांट्रेक्ट कर लिया, लेकिन इसे कब तक जारी रखा जा सकता है। श्रीपुरा गल्र्स स्कूल में लगवाए वाटर कूलर का मेंटिनेंस वह लोग खुद करते हैं तो फिर अस्पताल प्रबंधन को क्या दिक्कत है। जबकि स्कूल को तो इस मद में पैसा भी नहीं मिलता।

rajasthanpatrika.com

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