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#प्यासा_अस्पताल: तड़पते मरीज, भटकते तीमारदार

Patrika news network Posted: 2017-04-15 21:35:01 IST Updated: 2017-04-15 22:34:28 IST
#प्यासा_अस्पताल: तड़पते मरीज, भटकते तीमारदार
  • राजस्थान पत्रिका डॉट कॉम अस्पताल में आने वाले मरीजों और तीमारदारों को ठंडा और साफ पानी देने के लिए आज से मुहिम चला रहा है। हम बताएंगे प्यासे अस्पतालों से पूरे हालात, ताकि अस्पताल प्रबंधन हालात सुधारने के लिए मजबूर हों और झुलसा देने वाली गर्मी में प्यास से तड़पते लोगों को ठंडा एवं साफ पानी मिल सके।

कोटा.

संभाग के सबसे बड़े अस्पताल... सालाना 15.30 लाख मरीजों की ओपीड़ी और वार्डों में 1.19 लाख मरीज भर्ती... बावजूद इसके महज 26 वाटर कूलरों का इंतजाम...जिसमें से 22 खराब पड़े हैं...कागजों में जिन चार वाटर कूलर के चलने का दावा किया जा रहा है वह भी उबला हुआ पानी उगल रहे हैं...पानी के लिए तड़पते मरीजों के तीमारदार अस्पतालों के बाहर सजी ठंडे पानी की दुकानों का शिकार बनने को मजबूर हैं। इसके लिए उन्हें ना सिर्फ अच्छी खासी जेब ढ़ीली करनी पड़ रही है, बल्कि खरीदकर लाया हुआ पानी बीमारिया भी परोस रहा है।





 राजस्थान पत्रिका डॉट कॉम ने हाड़ौती के तीन बड़े अस्पतालों एमबीएस हॉस्पीटल, जेके लॉन और नए अस्पताल में जाकर हालात का जायजा लिया तो झुलसा देने वाली गर्मी में मरीज और तीमारदार प्यास से तड़पते मिले। चिकित्सक और अस्पताल का स्टॉफ अपने लिए बोतलों में पानी लेकर आ रहा था, लेकिन तीमारदार पानी की तलाश में अस्पताल से बाहर खुली दुकानों तक की दौड़ लगा रहे थे। 




एमबीएस अस्पताल से हर मिनट करीब चार लोग पानी की बोतल लेकर 45 डिग्री सेल्यिस पारे में तपते हुए बाहर निकलते है। ये अस्पताल के बाहर गंदे नाले के ऊपर लगे वाटर कूलर पर पहुंचते है। यहां गंदगी के बीच जद्दोजहद करते हुए ठंड़ा पानी अपनी बोतल में भरते है। पहले अपना हलक तर करते है और फिर इस बोतल को लेकर वार्ड में भर्ती मरीज तक पहुंचते हैं, ताकि उसे भी ठंड़ा पानी नसीब हो। यह हालात एमबीएस हॉस्पीटल के ही नहीं कोटा के तीनों बड़े अस्पतालों के हैं।





तीनों अस्पतालों में एक भी वाटर कूलर ठीक से नहीं चल रहा है। खराब पड़े वाटर कूलरों की जानकारी होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन इन्हें ठीक कराने को तैयार नहीं है। जिसके चलते प्यास के कारण मरीज तड़प रहे हैं और पानी का इंतजाम करने के लिए तीमारदारों को भटकना पड़ रहा है।


असलियत देख ली तो पानी नहीं पीएंगे

एमबीएस अस्पताल में 12 वॉटर कूलर हैं। जिसमें से 11 कबाड़ बन चुके हैं। जबकि इमरजेंसी में सर्जिकल वार्ड के पास लगे वॉटर कूलर की हालत ऐसी है कि उसे मरीज या तीमारदार पीछे से देख लें तो उल्टी आ जाए और कभी इस अस्पताल का पानी ना पीएं। इस वाटर कूलर पर काई जमी हुई है। इससे भी खराब हालात मेल मेडिकल वार्ड के है। वहीं कैंसर वार्ड के बाहर लगा वाटर कूलर तो चालू ही नहीं है।




11 में नौ वाटर कूलर पड़े हैं खराब 

नए अस्पताल की ओपीडी में वॉटर कूलर शोपीस बने हुए हैं। साफ पानी के लिए आरओ सिस्टम की तो बात ही रहने दीजिए। पानी की गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मरीज जिस पानी को पीते हैं उसे ही अस्पताल में साफ-सफाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है। प्रथम तल पर मनोचिकित्सा विभाग के पीछे के गलियारें में केवल एक वाटर कूलर लगा हुआ है। यह भी गर्म पानी दे रहा है। गायनी वार्ड के सामने का वाटर कूलर भी खराब पड़ा है। एेसे लोगों को नीचे प्याऊ  से ही पानी लेने के लिए आना पड़ता है। यह हालात तब हैं जब खराब पड़े वॉटर कूलरों को ठीक कराने के लिए अस्पताल प्रबंधन के पास फरवरी महीने में ही रिपोर्ट आ चुकी थी।


जेके लोन में एक जगह पानी, वह भी गर्म

जेके लोन अस्पताल के कागजों में तीन वाटर कूलर काम कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में यहां सिर्फ  गायनी वॉर्ड के बाहर ही एक वाटर कूलर लगा हुआ है। वह भी गर्म पानी दे  रहा है। यहां हालत इस कदर बदतर हैं कि अस्पताल के वार्डों में पीने के पानी का कोई इंतजाम ही नहीं है। ऐसे में मरीज और परिजन खाली बोतलें लेकर अस्पताल के बाहर तक दौड़ते हुए नजर आते है।


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