देश-दुनिया में थी कोटा आईएल की धाक, नहीं बचा पाए साख

Patrika news network Posted: 2017-04-19 09:26:40 IST Updated: 2017-04-19 09:26:40 IST
देश-दुनिया में थी कोटा आईएल की धाक, नहीं बचा पाए साख
  • आईएल कोटा की ख्याति देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक थी। कम्पनी में निर्मित उपकरणों की काफी मांग थी। कम्पनी थर्मल, परमाणु संयंत्र के लिए वॉल्व व पैनल बनाती थी।

कोटा.

आईएल कोटा की ख्याति देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक थी। कम्पनी  में निर्मित उपकरणों की काफी मांग थी। कम्पनी थर्मल, परमाणु संयंत्र के लिए वॉल्व व पैनल बनाती थी। रेलवे सिग्लन की केबल तैयार करती थी। रक्षा मंत्रालय के डिफेंस डिपार्टमेंट में टैंक व मिसाइल की चिप तैयार होती थी। 


टेलीकॉम, बीएसएनएल समेत अन्य निजी कम्पनियों के उपकरण यहां बनते थे। यहां के उपकरणों की जापान व रूस में मांग रहती थी। भारत सरकार की पहली पब्लिक कम्पनी थी। इसमें पहली बार कम्प्यूटराइज्ड मशीनों का प्रयोग किया गया। इसी से इसकी गुणवत्ता बढ़ी और विदेशों में भी उत्पादों की मांग बढ़ी, लेकिन समय के साथ कम्पनी तकनीक को अपडेट नहीं कर सकी। इस कारण धीरे-धीरे कम्पनी घाटे में चली गई और ऑर्डर नहीं मिलने से बंद हो गई।



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विदेशों तक जाते थे उपकरण

डी.एल. रैगर ने कहा कि 1981 से वह कम्पनी में कार्यरत थे। यहां बने उपकरणों की देश-विदेश में मांग थी। कम्पनी टेलीकॉम, थर्मल, परमाणु संयंत्र, रेलवे, सिविल डिफेंस, बीएसएनएल, रक्षा मंत्रालय के महत्वपूर्ण उपकरण तैयार करती थी।

अपडेट नहीं की टेक्नोलॉजी

आईएल के लेखाधिकारी डी.के. मेहरा ने बताया कि वह 1981 से कम्पनी में कार्यरत रहे। कुप्रबंधन व समय के साथ नई टेक्नोलॉजी अपडेट नहीं करने से बुरे दिन आए। राज्य सरकार का साथ नहीं मिलने से आज कम्पनी बंद हो गई। 


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आ चुके हैं दिग्गज

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व केन्द्रीय मंत्री मुरलीमनोहर जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडि़या व अन्य जनप्रतिनिधि कोटा आईएल में आए थे। 1980 के दशक में कम्पनी को राष्ट्रीय सुरक्षा पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

नहीं मिला प्रमाण पत्र

कर्मचारियों ने बताया कि कम्पनी की तरफ से उन्हें सेवानिवृत्ति का कोई प्रमाण पत्र नहीं दिया गया। कर्मचारियों की ड्यू सैलेरी के अलावा  कोई भुगतान नहीं किया गया। 23 अप्रेल को पीएफ व शेष भुगतान के लिए आईएल कम्प्यूनिटी सेंटर में बैठक बुलाई गई है। 

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बचाने की बहुत कोशिश की

आईएल बंद होने का क्या कारण रहा?

सीएमडी एम.पी. ईश्वर ने बताया कि कम्पनी को बचाने के लिए काफी कोशिश की, लेकिन हम बचा नहीं सके। सरकार की ओर से आर्थिक सहायता के लिए किस्तों में डिमांड की थी, लेकिन मदद नहीं मिली। 


सम्पत्ति का क्या होगा?

कम्पनी के 410 में से 409 कर्मचारियों को वीआरएस दिया है। खुद के अलावा प्रशासनिक भवन में कार्यरत 20 कर्मचारी उस समय तक रहेंगे, जब तक सबका भुगतान नहीं हो जाता। इसके बाद कम्पनी पूर्ण रूप से बंद हो जाएगी। कम्पनी की सम्पत्ति राज्य सरकार को सौंप दी जाएगी।


कर्मचारियों के भुगतान की क्या व्यवस्था रहेगी?

कर्मचारियों के भुगतान के लिए चार सौ करोड़ की राशि आई है। उससे भुगतान करेंगे। कोर्ट में चल रहे मामलों के अलावा सभी कर्मचारियों को पीएफ भुगतान की कोशिश रहेगी। जिन कर्मचारियों पर मकान के बिजली-पानी का बिल बकाया है, उनसे समझाइश की जाएगी। उनके पीएफ की राशि से वसूली की जाएगी।


रोजगार का मिलता था प्रशिक्षण

आईएल बेरोजगारों के लिए एक आशा की किरण थी। कम्पनी युवाओं के लिए प्रशिक्षण सेंटर संचालित करती थी। यूथ कॉर्डिनेटर अनुज विलियम्स ने बताया कि आईटीआई, एमबीए व इंजीनियरिंग के युवा तीन माह का विशेष प्रशिक्षण लेते थे। उसके बाद यहां से जारी सर्टिफिकेट से अन्य उपक्रमों में नौकरी मिलती थी।


नहीं लिया वीआरएस

आईएल में मेडिकल मेल नर्स के पद पर कार्यरत दिसम्बर बैरवा ने बताया कि वह 30 अप्रेल 1990 से कम्पनी में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन कम्पनी ने अचानक बुलाकर वीआरएस के लिए दबाव बनाया, लेकिन उन्होंने वीआरएस नहीं लिया। उन्होंने बताया कि वे कई सालों से कम्पनी से जुड़े हैं, जबरन वीआरएस नहीं लेंगे।

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