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#Hamare_Shivalay: टीले पर शिव विराजे, नाम पड़ गया टीलेश्वर

Patrika news network Posted: 2017-07-17 18:54:05 IST Updated: 2017-07-17 18:54:05 IST
#Hamare_Shivalay: टीले पर शिव विराजे, नाम पड़ गया टीलेश्वर
  • टीले पर शिव की मूर्ति को देखा तो नाम रख दिया टीलेश्वर महादेव। कोटा के घोड़े वाले बाबा चौराहे पर स्थित टीलेश्वर महादेव मंदिर शहर के लोगों के लिए आस्था का प्रमुख केन्द्र बन गया है।

कोटा.

टीले पर शिव की मूर्ति को देखा तो नाम रख दिया टीलेश्वर महादेव। और धीरे-धीरे भक्तों की भीड़ बढ़ती गई। लोगों की आस्था इतनी कि यहां किसी विशेष दिवस पर नहीं बल्कि हर दिन भजन कीर्तन व अभिषेक होते रहते हैं। भक्तों की भीड़ लगी रहती है। यूं तो शहर के सभी दूरदराज इलाकों से श्रद्धालु यहां आते हैं, लेकिन शेखावटी क्षेत्र के लोगों का इस मंदिर से विशेष जुड़ाव है।


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कहानी है, घोड़े वाले बाबा चौराहे पर स्थित टीलेश्वर महादेव मंदिर की। यह मंदिर शहर के लोगों के लिए आस्था का प्रमुख केन्द्र बन गया है। इसके इतिहास की बात करें तो मंदिर समिति के सचिव राजेन्द्र अग्रवाल बताते है कि टीले पर भगवान शिव विराजमान थे। आसपास जंगल था। 



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शहर का दायरा बढ़ा और यह परकोटे से बाहर निकला तो शॉपिंग सेंटर बसा। इसकी बसावट के बाद टीले पर विराजमान भगवान शिव के दर्शन को श्रद्धालु आने लगे। शिव के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं के मन को शांति का अनुभव होने लगा। इस कारण लोगों का जुड़ाव बढ़ गया। 



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करीब 47 जगह से लोगों ने स्थान के विकास का बीड़ा उठाया। टीले पर विराजमान भगवान शिव को टीलेश्वर नाम दे दिया और मंदिर का विकास शुरू किया। मंदिर में शिव परिवार के अलावा भगवान शिव पार्वती की विशेष प्रतिमा भी स्थापित की गई। इसके बाद मंदिर में समय-समय पर झुंझुनूं वाली रानी दादी मां, हनुमान, रामदरबार, कृष्ण व अन्य विग्रह यहां विराजमान है। वर्तमान में यह शहर के भव्य मंदिरों में से एक है। खास अवसरों पर विद्युत सज्जा के बाद मंदिर की शोभा देखते ही बनती है। 



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सचिव अग्रवाल के अनुसार मंदिर के विकास के लिए नगर विकास न्यास से जमीन ली गई, फिर यहां सभागार का भी निर्माण किया। कथा, अनुष्ठान व अन्य सामाजिक आयोजन यहां होते रहते हैं, या यूं कहें कि मंदिर धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक आयोजनों का भी केन्द्र बन गया है। 

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