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OMG! किसानों के लिए यमराज बना जून 2017, जानकर आप का भी दिल बैठ जाएगा

Patrika news network Posted: 2017-06-28 08:52:21 IST Updated: 2017-06-28 08:52:21 IST
OMG! किसानों के लिए यमराज बना जून 2017, जानकर आप का भी दिल बैठ जाएगा
  • हाड़ौती के किसनों के लिए जून 2017 यमराज बनकर उनकी जिंदगी में आया और सब कुछ खत्म कर गया। अब तक संभाग में पांच किसानों की लहसुन के दाम से मौत हो चुकी है।

कोटा. अयाना. मांगरोल.

एक के बाद एक उजड़े परिवार, अनाथ होते  गए मासूम

किसान के खेत और खलिहान में खुशी फैलाने वाला लहसुन इस बार जानलेवा साबित हो रहा है। मौजूदा भावों में बुवाई का खर्च भी नहीं निकलने तथा कर्ज के कारण परेशान किसान खुदकुशी करने कर रहे हैं। हाड़ौती के किसनों के लिए जून 2017 यमराज बनकर उनकी जिंदगी में आया और सब कुछ खत्म कर गया। इस माह में लहसुन के दाम कम मिलने से किसी की सदमे से तो किसी ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। 


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हाड़ौती में 3 जून को लहसुन के कम भाव मिलने से सदमे में रोण निवासी सत्यनारायण मीणा की मौत हो गई। वहीं, 21 जून को सकरावदा निवासी संजय मीणा ने कर्ज से परेशान होकर फंदा लगा कर आत्महत्या कर ली। 23 जून को सुनेल निवासी बगदीलाल राठौर भी कर्ज का दबाव नहीं सह सके और जिंदगी हार बैठे और 24 जून को डग निवासी शेख हनीफ ने कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। 


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इसी तरह 27 जून को  मंगलवार को कोटा जिले के अयाना थाना क्षेत्र के श्रीपुरा निवासी मुरलीधर मीणा (32) ने लहसुन के कम दाम मिलने से आहत होकर जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी है। तबीयत बिगडऩे पर परिजन उसे पहले मांगरोल और  बारां अस्पताल लेकर गए।  वहां रेफर करने पर परिजन उसे लेकर देर रात को कोटा लाए, यहां एमबीएस अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। 


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बारां से लाया जहर

मृतक के बड़े भाई कैलाश शंकर ने बताया कि मुरलीधर पर करीब 5-6 लाख का कर्ज था।  मंडी में लहसुन का भाव कम मिला और आढ़तिए ने भी पैसे नहीं दिए, इससे वह सदमे में आ गया। सल्फास की गोलियां वह बारां से ही लेकर आया था। उसने करीब 20 बीघा में खेती की थी। उसने 6 बीघा  में लहसुन बोया था तथा अन्य में धनिया तथा गेहूं उगाई थी। पहले धनिया बेचा, उसके भी कम दाम मिले थे। ऐसे में उसने लहसुन रोक रखा था। देनदारियों के बढ़ते दबाव के बाद वह 27 कट्टे लहसुन बेचने बारां गया था।  मंडी में 1400 का ही भाव मिला। इसके बाद वह अन्य किसानों को बिना बताए गांव लौट आया और  घर पर रखा जहरीला पदार्थ खा लिया।


उठा पिता का साया 

मृतक के 8 साल की लड़की और 6 साल का लड़का है। जिस समय मुरलीधर ने जहरीला पदार्थ खाया उस समय पत्नी दोनों  बच्चों के साथ पीहर गई हुई थी।


पुलिस जांच में सामने आया है कि आत्महत्या के कारण ऋण नहीं बल्कि अन्य थे। मानसून के मद्देनजर 16 लाख क्ंिवटल बीजों की व्यवस्था कर ली गई है, किसानों को बीज की कमी नहीं आने दी जाएगी। 

प्रभुलाल सैनी, कृषि मंत्री 

पत्रिका टिप्पणी: जिस लहसुन से जीवन संवरने का सपना देखा, उसी ने ले ली जान

जिस लहसुन के उत्पादन से धरतीपुत्र ने जीवन संवरने के सपने देखे वही उनकी जान ले रहा है। एक के बाद एक किसान मर रहे हैं और जिम्मेदार बेतुके बयान दे रहे हैं। इससे उनकी पीड़ा और बढ़ रही है। कोटा जिले में फिर एक और युवा किसान ने हताश होकर जान दे दी। 


सोचने वाली बात  ये है कि कोई यूं ही जान नहीं दे देता। इन आत्महत्याओं से ऐसा प्रतीत होता है कि सरकारी कुप्रबंधन ने किसानों के पास जीने का कोई विकल्प नहीं छोड़ा।  शर्म की बात तो यह है कि किसानों के वोट से सत्ता में आने वाले मंत्री उनकी लाचारी को चुनौती दे रहे हैं। किसान के दर्द का शासन को सबकुछ पता होते हुए भी इसी तरह नजर अंदाज किया तो यह मर्ज और बढ़ सकता है। बयानबाजी छोड़कर जिम्मेदारों को किसानों को राहत देने के बारे में तत्काल पहल करनी चाहिए। 


कोटा में पिछले माह हुए किसान एग्रोटेक मीट में किसानों का जीवन संवारने की बड़ी-बड़ी बातें की गई, लेकिन अब लग रहा है कि वो सब करोड़ों रुपए दिखावे और कंपनियों को प्रोडक्ट बेचने का मंच देने के लिए ही किया गया। अच्छा होता करोड़ों रुपए उस आयोजन पर लगाने के बजाय समर्थन मूल्य पर लहसुन क्रय करने पर खर्च किए जाते। किसानों को लागत मूल्य भी मिल जाता तो आत्महत्या के हालात नहीं बनते। 

- जग्गो सिंह धाकड़

rajasthanpatrika.com

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