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17 जुलाई को इन गांवों में रहेगा 'कर्फ्यू' दूध भी बिकने नहीं आएगा शहर

Patrika news network Posted: 2017-07-10 08:10:31 IST Updated: 2017-07-10 08:13:40 IST
17 जुलाई को इन गांवों में रहेगा 'कर्फ्यू' दूध भी बिकने नहीं आएगा शहर
  • नई धान मंडी स्थित ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन सभागार में संभाग स्तरीय किसान सम्मेलन हुआ। जिसमें निर्णय लिया कि जिले में सुल्तानपुर, इटावा, बड़ोद, सांगोद, मंडाना, मांगरोल, केपाटन, कापरेन बंद रखा जाएगा। व्यावसायिक गतिविधियां नहीं होने दी जाएगी।

कोटा.

राज्य सरकार से कर्ज मुक्ति व केंद्र सरकार से स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू कराने की मांग को लेकर रविवार को नई धान मंडी स्थित ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन सभागार में संभाग स्तरीय किसान सम्मेलन का आयोजन हुआ।  


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सम्मेलन में सभी किसान व महिला प्रतिनिधियों ने एकजुटता दिखाते हुए 17 जुलाई को  किसान कफ्र्यू को व्यापक रूप से सफ ल बनाने का आग्रह किया।  सम्मेलन में अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष दुलीचंद बोरदा ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मान लेती, आंदोलन जारी रहेगा। 


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सम्मेलन में संयुक्त किसान समन्वय समिति, संघर्ष समिति व महिला संगठनों ने भी एकजुटता दिखाई। सेंटर ऑफ  ट्रेड यूनियन के जिला मंत्री उमाशंकर, राजस्थान ट्रेड यूनियन केंद्र के तारकेश्वर तिवारी, जनवादी महिला समिति की पुष्पा खींची, नौजवान सभा के विजेंद्र सिंह दायमा ने किसानों को समर्थन देने का फैसला लिया। 


यह गांव रहेंगे बंद

सम्मेलन में निर्णय लिया कि जिले में सुल्तानपुर, इटावा, बड़ोद, सांगोद, मंडाना, मांगरोल, केपाटन, कापरेन आदि में बंद रखा जाएगा। व्यावसायिक गतिविधियां नहीं होने दी जाएगी। साथ ही मृतक किसानों के परिवारों को उचित सहायता दिलाने के लिए परिजनों के साथ आईजी कार्यालय पर धरना देने का प्रस्ताव लिया। ग्राम पंचायतों की आमसभा में किसानों की मांगों के समर्थन में प्रस्ताव पारित करा सरकार को भिजवाने के लिए जनप्रतिनिधियों से आग्रह करेंगे। 

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कोई भी उत्पाद नहीं जाएगा गांव से बाहर 

किसान प्रतिनिधियों ने बताया कि कफ्र्यू के दौरान किसान अपने दूध, फ ल, सब्जी, अनाज आदि उत्पाद मंडी में नहीं ले जाएंगे और किसी भी सरकारी कर्मचारी, अधिकारी को गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। न ही कोई सरकारी कार्यक्रम होने दिया जाएगा। 


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किसानों की टोलियां बनाई जाएगी। वह गांवों में सम्पर्क कर व्यापारी संगठनों से भी सहयोग की अपील करेगी। कुछ स्थानों पर महिलाओं को भी मैदान में उतारने का निर्णय लिया, जो कस्बों को जोडऩे वाले मार्गों पर चक्काजाम करेगी। आवश्यक सेवाओं को कफ्र्यू से मुक्त रखा जाएगा।


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