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खाली भूखण्डों में भरे पानी में पनप रहे इतने मच्छर की शहर को कर दें बीमार

Patrika news network Posted: 2017-07-18 10:10:05 IST Updated: 2017-07-18 10:10:05 IST
खाली भूखण्डों में भरे पानी में पनप रहे इतने मच्छर की शहर को कर दें बीमार
  • मानसून सीजन शुरू हो चुका है। शहर में एक-दो बार बारिश भी हो चुकी है। इससे विभिन्न कॉलोनियों में खाली पड़े भूखण्डों में पानी भर गया है। जलभराव वाले खाली भूखण्ड मच्छरों की नर्सरी बन गए हैं।

कोटा.

मानसून सीजन शुरू हो चुका है। शहर में एक-दो बार बारिश भी हो चुकी है। इससे विभिन्न कॉलोनियों में खाली पड़े भूखण्डों में पानी भर गया है। जलभराव वाले खाली भूखण्ड मच्छरों की नर्सरी बन गए हैं। यहां मच्छर पनप रहे हैं। इनसे बीमारी फैलने का खतरा मंडरा रहा है।


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खाली भूखण्डों में भरे पानी की निकासी की व्यवस्था करना नगर निगम की जिम्मेदारी है, लेकिन निगम अधिकारी जन स्वास्थ्य के प्रति गंभीर नहीं। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने अब तक घर-घर सर्वे शुरू नहीं किया है, वह सर्वे कर निगम को कार्रवाई के लिए लिखेगा। 


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जनता जागे

दोनों विभाग जाने कब कार्रवाई करेंगे, जनता को खुद ही जागरूक होना पड़ेगा। लोगों को मच्छरों की ब्रीडिंग रोकने के प्रयास करने होंगे। जनता अपने आस-पास जहां जलभराव देखे, वहां जला तेल व केरोसिन का छिड़काव करे, इससे मच्छर का लार्वा नहीं पनपेगा।

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एेसे पनपते हैं

खाली प्लॉटों, घर की छतों और खुले में भरे पानी में मच्छर अंडे देते हैं। ये मच्छर वायरसों से संक्रमित होकर लोगों और साथ ही अपने अंडों से संक्रमित मच्छरों को बढ़ाते हैं।

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एमबीएस में भी डेंगू संक्रमित मच्छर

एमबीएस अस्पताल में भी डेंगू संक्रमित मच्छर हैं। यहां कार्यरत रेजीडेंट चिकित्सक डॉ. प्रनीत चौधरी डेंगू पीडि़त हैं। उनकी ड्यूटी दिनभर यहीं रहती है। एेसे में वह यहीं डेंगू की चपेट में आए हैं। डॉ. चौधरी नयापुरा में रहते हैं। अन्य चिकित्सकों का कहना है कि ओपीडी वार्डों और गलियारों में मच्छरों का प्रकोप है। 


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यहां खतरा ज्यादा

राजीव गांधी नगर, बोरखेड़ा, जयहिंद नगर, नृमता आवास, रंगबाड़ी, विवेकानंद नगर, डीसीएम क्षेत्र, कुन्हाड़ी क्षेत्र के साथ शहर की कई कच्ची बस्तियों में बड़ी संख्या में भूखंडों में जलभराव से मच्छर पनप रहे हैं।

हर साल उठता है मुद्दा

हर साल चिकित्सा विभाग के सर्वे में खाली प्लॉटों में डेंगू के लार्वा मिलते हैं। इस बारे में नगर निगम और यूआईटी को सूचना भी दे दी जाती है। दोनों विभाग खाली प्लॉट मालिकों को नोटिस देने और उन्हें निरस्त करने के निर्देश देते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जाती।

यह भी बढ़ा सकते हैं बीमारी

- प्राइवेट अस्पताल से नहीं हो रही रिपोर्टिंग : चिकित्सा विभाग की रिपोर्टिंग केवल सरकारी अस्पतालों से हो रही है। इस माह में 40 पॉजीटिव रोगी सामने आ चुके हैं, लेकिन इनमें एक भी निजी अस्पताल से नहीं है। निजी अस्पताल में आने वाले मरीजों का रिकॉर्ड नहीं आ रहा। पिछले साल 738 डेंगू रोगी सामने आए थे। इनमें निजी अस्पतालों के मरीज भी शामिल थे।


- नहीं हो रहा एलाइजा कन्फर्म : सरकार डेंगू के रेपिड डायग्नोस (कार्ड) टेस्ट से पॉजीटिव मरीज को पीडि़त नहीं मानती। पिछले साल शहर में कार्ड टेस्ट से पॉजीटिव आने वाले मरीजों को कन्फर्म करने के लिए एलाइजा टेस्ट करवाया था। यह प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हुई।


- देर से सूचना : एमबीएस अस्पताल की एलाइजा मशीन से जांच में पुष्टि होने के बाद ही चिकित्सा विभाग को रिपोर्ट दी जाती है। यह रिपोर्टिंग भी चिकित्सा विभाग को तीन दिन बाद मिल रही है। बारां जिले के पाठेड़ा निवासी चार साल का बच्चा दिव्यांश डेंगू पीडि़त है, वह 14 जुलाई को ही डेंगू पॉजीटिव आ गया, लेकिन उसकी रिपोर्ट सीएमएचओ ऑफिस में 16 तारीख को पहुंची।


-  कार्ड से पॉजीटिव तो एक्टीविटी नहीं : कार्ड टेस्ट से पॉजीटिव आने पर मरीज के घर एंटीलार्वा एक्टिविटी नहीं होती है। एेसे में इन लोगों के आसपास के मच्छर ब्रीडिंग को ब्रेक नहीं लगता है। साथ ही बड़े मच्छरों को मारने के लिए फोगिंग भी नहीं होती है।

पीएचसी को नोटिस

घर-घर सर्वे और एंटीलार्वा एक्टिविटी शुरू करने के लिए वॉलेंटियर नहीं लगाने के मामले में सीएमएचओ कार्यालय से पीएचसी प्रभारियों को नोटिस थमाए गए हैं। इसमें अनुमति के बावजूद घर-घर सर्वे व एंटीलार्वा एक्टिविटी जैसे, कूलर, पानी भराव की जगह को चेक करने का कार्य शुरू नहीं होने का हवाला दिया है। इसके बाद शहर की 20 से ज्यादा पीएचसी की जगह केवल तीन में ही वॉलेंटियर तैनात हुए हैं।


जल्द ही मीटिंग कर निजी अस्पतालों से मौसमी बीमारियों की रिपोर्टिंग सुधारने की बात की जाएगी। एमबीएस सेन्ट्रल लैब से पीडि़तों की समय पर जानकारी मिले, इस बारे में प्रबंधन को कहा जाएगा। 

डॉ. अनिल कौशिक, सीएमएचओ कोटा

rajasthanpatrika.com

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