300 फीट ऊंची पहाड़ी से कूदने वाली सत्यभामा की अधूरी रह गई आखिरी ख्वाहिश

Patrika news network Posted: 2017-05-14 08:13:01 IST Updated: 2017-05-14 08:34:15 IST
  • क्या आपको पता है कि गेपरनाथ की 300 फीट ऊंची पहाड़ी से कूद खुदकुशी करने वाली सत्यभामा एक ख्वाहिश थी जो अब अधूरी रह गई। सत्यभामा की सोलह शृंगार के साथ एक चीता पर प्रेमी के साथ अंतिम संस्कार की आखिरी इच्छा थी लेकिन उसकी यह ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी।

कोटा.

गेपरनाथ घाटी में कूदकर खुदकुशी करने वाले प्रेमी युगल ने जीते-जी भले ही अपनी हर इच्छा पूरी की हो, लेकिन मौत के बाद उन्हें एक साथ जलाने की उनकी आखिरी इच्छा पूरी नहीं हो सकी।  शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शवों का परिजनों ने अलग-अलग अंतिम संस्कार किया।  


जयपुर के महेश नगर निवासी विनोद कुमार और टोंक हाल बोरखेड़ा के प्रताप नगर निवासी सत्यभामा ने शुक्रवार को गेपरनाथ की करीब तीन सौ फीट ऊंची पहाड़ी से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। गिरने से दोनों के शव पूरी तरह से क्षत-विक्षत हो गए थे। सूचना पर आरकेपुरम पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकाला था। 



उन्हें एमबीएस अस्पताल की मोर्चरी में  रखवाया था। थानाधिकारी शौकत खान ने बताया कि दोनों पक्षों में से किसी ने भी एक दूसरे के खिलाफ कोई रिपोर्ट नहीं दी है।  दोनों के परिजनों के आने पर शनिवार को उनका पोस्टमार्टम कराया गया। 


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विनोद के पिता प्रभुलाल समेत अन्य परिजन शव को लेकर जयपुर चले गए, जबकि सत्यभामा के पिता प्रेमशंकर व परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार बोरखेड़ा क्षेत्र में ही किया। गौरतलब है कि विनोद शुक्रवार सुबह ही जयपुर से कोटा आया था। 


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उसने कोटड़ी क्षेत्र से टैक्सी की और शुभम गार्डन बोरखेड़ा के पास सत्यभामा के घर पहुंचा। यहां सड़क पर ही उसने सत्यभामा के परिजनों को सामान दिया। इसके बाद सत्यभामा को गेपरनाथ जाने की जानकारी दी थी और कहा कि एक घंटे में लौटेंगे। घर आकर ही खाना खाएंगे। इसके बाद टैक्सी लेकर गेपरनाथ पहुंचे थे।

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सुसाइड नोट में लिखा



सत्यभामा ने सुसाइट नोट में नौ मई की तारीख लिखी है। इसमें लिखा है कि विनोद ने मेरे इलाज के लिए मेहनत कर मुझे ठीक किया है। मेरी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। मैं जिंदा रही तो मेरी शादी विनोद से कर देना। एेसा नहीं हुआ तो मेरी अंतिम इच्छा के मुताबिक मुझे सोलह शृंगार कर विनोद के साथ अंतिम संस्कार कर देना। पिता से कहा है कि गांव के घर में रामायण व शक्ति पाठ कराना और बहिन की शादी करना।

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